बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायकों और विधान पार्षदों की ट्रेनिंग कार्यक्रम रखा गया था । पार्टी की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने किया। बैठक में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री श्रवण कुमार समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जेडीयू के विधायकों और विधान पार्षदों को सदन की कार्यवाही से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी देना था। पार्टी की ओर से उन्हें बताया गया कि विधानसभा और विधान परिषद में किस तरह सवाल उठाने हैं, बजट पर अपनी बात किस तरीके से रखनी है और सदन में पार्टी की नीतियों एवं सरकार के कामकाज को प्रभावी ढंग से कैसे प्रस्तुत करना है।

नीतीश कुमार ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन

जेडीयू के इस विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत नीतीश कुमार ने की। पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों को संसदीय कार्यप्रणाली और सदन के भीतर उनकी भूमिका को लेकर जानकारी दी गई। माना जा रहा है कि पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए अपने विधायकों और विधान पार्षदों को सदन में अधिक प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए तैयार कर रही है। कार्यक्रम में संजय झा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। विधायकों और विधान पार्षदों के लिए आयोजित इस बैठक में सवाल पूछने की प्रक्रिया, बजट चर्चा और सदन में विभिन्न मुद्दों को उठाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

लेकिन ललन सिंह की गैरमौजूदगी ने खींचा ध्यान

बैठक में नेताओं की मौजूदगी के बीच एक नाम ऐसा रहा, जिसकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठने लगे। कार्यक्रम में अनंत सिंह भी नहीं पहुंचे। ऐसे में दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर पत्रकारों ने जेडीयू नेताओं से सवाल किया। खास तौर पर ललन सिंह के नहीं पहुंचने को लेकर सवाल किया गया कि आखिर वह बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए।

भगवान सिंह कुशवाहा ने क्या कहा?

जेडीयू विधायक और बिहार सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा से जब ललन सिंह और अनंत सिंह की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ललन सिंह केंद्र में मंत्री हैं और उनके जिम्मे कई काम होते हैं। ऐसे में उनके कार्यक्रम में नहीं आने की कोई वजह हो सकती है।

वहीं, अनंत सिंह के बैठक में नहीं पहुंचने के सवाल पर भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि उनके नहीं आने की कोई वजह होगी, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। इस दौरान बैठक में किसी नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर भगवान सिंह कुशवाहा ने साफ कहा कि आज की बैठक में नाम बदलने को लेकर कोई बात नहीं हुई है।

विधायक अजीत कुमार बोले- ललन बाबू को आना चाहिए था

ललन सिंह की गैरमौजूदगी को लेकर जेडीयू विधायक अजीत कुमार का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि ललन सिंह को बैठक में आना चाहिए था। उन्होंने दोहराते हुए कहा कि पार्टी के लोगों का मानना है कि ललन बाबू को इस कार्यक्रम में आना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या ललन सिंह पार्टी से नाराज चल रहे हैं, तो अजीत कुमार ने इस पर स्पष्ट जवाब देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस बारे में वह कुछ नहीं बता सकते।

गैरमौजूदगी से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

दरअसल, जेडीयू की इस बैठक का मकसद विधायकों और विधान पार्षदों को सदन के लिए तैयार करना था। ऐसे में पार्टी के कई बड़े चेहरों की मौजूदगी के बीच ललन सिंह और अनंत सिंह का नहीं पहुंचना स्वाभाविक तौर पर चर्चा का विषय बन गया।

हालांकि, नेताओं की ओर से अभी तक दोनों की गैरमौजूदगी को लेकर किसी तरह की नाराजगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। भगवान सिंह कुशवाहा ने ललन सिंह के केंद्रीय मंत्री होने के कारण उनकी व्यस्तता की संभावना जताई, जबकि अजीत कुमार ने कहा कि उन्हें बैठक में आना चाहिए था।

ऐसे में फिलहाल बैठक के अंदर विधायकों को दिए गए संसदीय प्रशिक्षण से ज्यादा चर्चा बाहर इस बात की हो रही है कि ललन सिंह और अनंत सिंह आखिर जेडीयू के इस अहम कार्यक्रम से दूर क्यों रहे। पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।