DESK: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। सुधाकर सिंह ने आगे कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो 2029 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता इसका जवाब देगी।
सुधाकर सिंह ने पत्र के जरिये केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाये। इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। सुधाकर सिंह ने पत्र में लिखा कि देशभर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और रोजगार की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और आम नागरिक शांतिपूर्ण ढंग से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप है कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट, कथित लाठीचार्ज और दुर्व्यवहार किया, जिससे पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया।
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2014 के चुनावी वादों की याद दिलाते हुए लिखा कि युवाओं और छात्रों को बेहतर भविष्य और भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना दिखाया गया था। लेकिन आज वही युवा अपने अधिकारों और रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों पर गर्व करने वाले देश में छात्रों के साथ हिंसक व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि इस घटना से ना केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों और कई मित्र देशों के लोगों ने भी इस घटना को अलोकतांत्रिक और अमानवीय बताया है।
सुधाकर सिंह ने अपने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व पर भी सवाल उठाये। कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई से सरकार की विश्वसनीयता और साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के कई नेता भी इस कार्रवाई से सहमत नहीं होंगे, लेकिन राजनीतिक कारणों से खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। सुधाकर सिंह ने आगे कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो 2029 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता इसका जवाब देगी।