PATNA: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर पोस्ट किए जाने के बाद उठे विवाद में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आशुलिपिक सागर प्रसाद के खिलाफ पटना के सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इस कार्रवाई का दस्तावेज भी सामने आया है, जिसमें सागर प्रसाद को मुख्यमंत्री कार्यालय का आशुलिपिक बताया गया है। प्राथमिकी में POCSO Act की धारा 23, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 73 और IT Act की धाराओं 66(E) व 67 का उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री की पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
19 सितंबर को जमुई में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की और सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री के प्रसार के खिलाफ भी कार्रवाई की।
इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल पर परिवार के साथ तस्वीर पोस्ट की गई। पोस्ट में मुख्यमंत्री ने पीड़िता को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाया था।
हालांकि, पोस्ट कुछ ही समय बाद हटा दी गई। लेकिन तब तक उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। इस तस्वीर को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राजद सांसद मीसा भारती ने मुख्यमंत्री पर POCSO एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया।
अब CMO के आशुलिपिक सागर प्रसाद पर FIR
25 सितंबर को सचिवालय थाना में दर्ज प्राथमिकी के लिए दिए गए आवेदन में कहा गया है कि सोशल मीडिया के X प्लेटफॉर्म पर जमुई कांड की पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर अपलोड की गई, जिसके बाद वह पोस्ट अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित हो गई।
आवेदन में कहा गया है कि इससे घटना से संबंधित संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हुई और पीड़िता की निजता एवं गरिमा प्रभावित होने तथा उसकी पहचान उजागर होने की स्थिति पैदा हुई। आवेदन के मुताबिक मामले का सत्यापन किए जाने पर पाया गया कि CMO कार्यालय के आशुलिपिक सागर प्रसाद ने पीड़िता की तस्वीर X पर अपलोड की थी। इसके बाद पुलिस से सागर प्रसाद के साथ-साथ पोस्ट को आगे प्रसारित करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया।
सचिवालय थाना कांड संख्या 200/26 दर्ज
सामने आए दस्तावेज पर दर्ज पुलिस कार्रवाई के अनुसार सचिवालय थाना कांड संख्या 200/26, दिनांक 25 सितंबर 2026 दर्ज की गई है। प्राथमिकी में इन धाराओं का उल्लेख है: धारा 73, BNS, धारा 23, POCSO Act, 2012, धारा 66(E), information Technology Act धारा 67, Information Technology Act। दस्तावेज पर लिखा है कि मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर सीमा कुमारी करेंगी।
POCSO की धारा 23 क्यों महत्वपूर्ण?
POCSO Act के तहत बच्चे की पहचान की गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। कानून में ऐसी जानकारी प्रकाशित या प्रसारित करने पर रोक है, जिससे यौन अपराध के पीड़ित बच्चे की पहचान सामने आ सकती है।
जमुई मामले में यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि बिहार पुलिस पहले से ही पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान कर कार्रवाई की गई है।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से सामने आई तस्वीर को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया था कि जब आम लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में कार्रवाई की जा रही है, तो ऐसी ही तस्वीर सरकारी तंत्र से सामने आने पर क्या कार्रवाई होगी।
तेजस्वी ने भी उठाया था सवाल
तस्वीर सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता की पहचान उजागर हुई और POCSO एक्ट की धारा 23 का उल्लंघन हुआ। मीसा भारती ने भी मुख्यमंत्री की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बिहार पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग की थी। अब सचिवालय थाने में FIR दर्ज होने के बाद यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर औपचारिक पुलिस जांच के चरण में पहुंच गया है।
क्या मुख्यमंत्री पर भी कार्रवाई होगी?
फिलहाल सामने आए FIR दस्तावेज में आरोपी के रूप में CMO के आशुलिपिक सागर प्रसाद का नाम है। उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ भी इसी FIR में आरोपी के तौर पर मामला दर्ज किया गया है।
अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि तस्वीर किसने पोस्ट की, पोस्ट करने की परिस्थितियां क्या थीं, तस्वीर किस स्रोत से प्राप्त हुई और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि तस्वीर से POCSO के तहत संरक्षित नाबालिग की पहचान किस हद तक उजागर हुई और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत किसकी क्या भूमिका बनती है।
सरकार के लिए भी बना संवेदनशील मामला
जमुई कांड में सरकार पहले ही आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल की बात कह चुकी है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान भी जल्द न्याय का भरोसा दिया था। लेकिन अब उसी मामले में पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने और CMO के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होने से सरकार के सामने एक अलग कानूनी और प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है।
जमुई कांड की जांच के साथ अब पीड़िता की पहचान सार्वजनिक किए जाने के मामले की जांच भी आगे बढ़ेगी। सचिवालय थाने में दर्ज FIR के बाद इस पूरे प्रकरण में पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।