पटना/जमुई: बिहार के जमुई में नाबालिग बच्ची से अभद्र व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सामने आए मामले में अब एक और नया मोड़ आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर जमुई पुलिस ने कार्रवाई की जानकारी साझा की है। पुलिस के मुताबिक, मामले में पहले ही विधि-सम्मत कार्रवाई की जा चुकी है। अब पीड़िता के परिजनों से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट किए जाने के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जमुई जिला अंतर्गत 19 सितंबर 2026 को एक नाबालिग बालिका और उसके साथी के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तेजी से तूल पकड़ा। पुलिस ने इस घटना को संज्ञान में लेते हुए मामले में कार्रवाई की। जमुई पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि घटना के संबंध में विधि-सम्मत कार्रवाई की गई है।
इस बीच 25 सितंबर को मामले ने एक बार फिर नया मोड़ लिया। पुलिस को सूचना मिली कि पीड़िता के परिजनों की एक फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपलोड की गई है। इसके बाद इस पोस्ट को लेकर भी पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस मामले में सीएमओ कार्यालय के एक कर्मी के खिलाफ कांड दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया है। यानी जिस मामले की शुरुआत नाबालिग से जुड़े वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने से हुई थी, उसमें अब सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट किए जाने का मामला भी जुड़ गया है। पुलिस ने साफ किया है कि दोनों पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया है।
सांसद मीसा भारती ने भी दिया आवेदन
मामले में राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठे हैं। पुलिस के अनुसार, लोकसभा सांसद मीसा भारती की ओर से इस मामले को लेकर एक आवेदन दिया गया है। आवेदन में मांग की गई है कि बिना जांच के किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।पुलिस ने बताया कि सांसद की ओर से प्राप्त आवेदन को दर्ज कांड के अनुसंधान का हिस्सा बना दिया गया है। अब जांच में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस की ओर से जारी बयान में खास तौर पर यह बात कही गई है कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष एवं नियमानुसार अनुसंधान किया जा रहा है। इसका मतलब है कि सोशल मीडिया पर सामने आए दावों और आरोपों के साथ-साथ पुलिस जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों को भी अहम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पोस्ट पर भी पुलिस की नजर
इस मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी चर्चा में है। पहले घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ और बाद में पीड़िता के परिजनों से जुड़ी तस्वीर को लेकर पुलिस को शिकायत मिली। ऐसे में पुलिस ने तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले को भी गंभीरता से लेते हुए केस दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी घोषित नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि दर्ज कांड के अनुसंधान में सांसद की ओर से प्राप्त आवेदन को भी शामिल कर लिया गया है और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है।
नाबालिग से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया पर तस्वीर, वीडियो या पहचान से संबंधित सामग्री साझा किए जाने को लेकर भी संवेदनशीलता बरतने की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक जांच के नतीजे का इंतजार करना महत्वपूर्ण होता है।फिलहाल जमुई पुलिस की जांच जारी है। एक तरफ 19 सितंबर की घटना से जुड़े मामले की कार्रवाई आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ 25 सितंबर को सामने आए सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि पूरे प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है।