PATNA: IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में 9 अभियुक्तों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।


कोर्ट के इस फैसले पर अब बीजेपी नेता और पूर्व में लालू की पार्टी आरजेडी से जुड़े रहे मृत्युंजय तिवारी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का जो फैसला आया है, इस मामले में राजनीतिक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने जो ऑब्जर्व किया है, उसके आधार पर फैसला सुनाया है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।


मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “न्याय की व्यवस्था यही है कि अगर कोई दोषी है तो उसे सजा मिलती ही है। अगर गलत किए हैं तो भुगतना पड़ेगा।” बता दें कि मृत्युंजय तिवारी हाल ही में राजद छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं।


7 आरोपियों को मिली राहत

आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने कुल 16 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इनमें से 7 आरोपियों को आरोपों से राहत देते हुए बरी कर दिया, जबकि 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं।


आरोप तय किए गए 9 लोगों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स के संचालक, सरला गुप्ता और सुजाता होटल्स के मालिक समेत अन्य लोग शामिल हैं।


क्या है IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस?

यह मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के संचालन के लिए टेंडर और लीज से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के आरोप के मुताबिक, इन होटलों का ठेका सुजाता होटल ग्रुप के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर को दिया गया था। आरोप है कि इसके बदले लालू परिवार से जुड़े लोगों को कथित तौर पर जमीन का लाभ मिला।


पटना में करीब तीन एकड़ जमीन से जुड़े लेनदेन को भी मामले की जांच का हिस्सा बनाया गया। आरोप है कि वर्ष 2005 में पटना के बेली रोड स्थित कीमती जमीन को कम कीमत पर दिया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 से 2014 के बीच लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की जमीन करीब 65 लाख रुपये में ट्रांसफर की गई। 


मामला सामने आने के बाद जुलाई 2017 में सीबीआई ने लालू परिवार के सदस्यों समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़े मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी शुरू की। इस मामले पर अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।