IRCTC Scam : आईआरसीटीसी होटल टेंडर घोटाला और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट आज यह फैसला सुनाएगी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग केस में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएं या नहीं। इस फैसले पर बिहार की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों की भी नजरें टिकी हुई हैं।


विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 9 जून की तारीख निर्धारित की थी। यदि अदालत आरोप तय करने का आदेश देती है तो मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ नियमित ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।


ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को प्रमुख आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा लालू परिवार के अन्य सदस्य भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। चार्जशीट में मीसा भारती, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव सहित कुल 16 लोगों के नाम शामिल हैं। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।


यह मामला उस समय का है जब वर्ष 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों के विकास, रखरखाव और संचालन का ठेका नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनी सुजाता होटल्स को दिया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस ठेके के बदले कंपनी के निदेशकों विजय कोचर और विनय कोचर ने पटना की एक बहुमूल्य जमीन को बेहद कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी कंपनी के नाम स्थानांतरित किया था।


जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई, जिसमें सरकारी नियमों और टेंडर प्रक्रिया में कथित रूप से हेरफेर किया गया। इसी आधार पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था, जबकि ईडी ने कथित अवैध कमाई और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।


गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज मुख्य भ्रष्टाचार मामले में अदालत पहले ही आरोप तय कर चुकी है और उसका ट्रायल जारी है। सीबीआई केस में आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। अब ईडी के मामले में अदालत का फैसला यह तय करेगा कि कथित अवैध संपत्ति और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोपों पर भी मुकदमा आगे बढ़ेगा या नहीं।


इस केस में केवल लालू परिवार ही नहीं, बल्कि तत्कालीन आईआरसीटीसी अधिकारियों और कारोबारी समूह के प्रतिनिधियों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आरोपियों में आईआरसीटीसी के तत्कालीन ग्रुप जनरल मैनेजर वीके अस्थाना और आरके गोयल के अलावा सुजाता होटल्स के निदेशक विनय कोचर और विजय कोचर भी शामिल हैं।


राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार में आगामी चुनावी गतिविधियों और विपक्षी राजनीति के बीच आने वाला यह निर्णय राजद नेतृत्व के लिए बड़ी राहत या नई चुनौती साबित हो सकता है। अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लालू परिवार और अन्य आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्ण ट्रायल का सामना करना पड़ेगा या नहीं। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की निगाहें दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट पर टिकी हुई हैं।