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07-Feb-2026 08:01 AM
By First Bihar
Pappu Yadav Arrest : पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद सचिवालय एसपी भानु प्रताप सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। करीब 31 साल पुराने एक मामले में शुक्रवार देर रात गर्दनीबाग पुलिस ने पप्पू यादव को मंदिरी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व सचिवालय एसपी भानु प्रताप सिंह ने किया। गिरफ्तारी से पहले करीब ढाई घंटे तक पुलिस और सांसद समर्थकों के बीच तनातनी का माहौल बना रहा, लेकिन पुलिस टीम अपने मिशन पर डटी रही और अंततः रात करीब 12 बजे पप्पू यादव को हिरासत में लेकर चिकित्सकीय जांच के लिए आईजीआईएमएस ले जाया गया।
भानु प्रताप सिंह की पहचान बिहार पुलिस के तेज-तर्रार और सख्त छवि वाले अधिकारियों में की जाती है। उनकी कार्यशैली और फैसले लेने की क्षमता ने उन्हें कम समय में ही अलग पहचान दिलाई है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी के मूल निवासी भानु प्रताप सिंह ने अपनी मेहनत और लगन से प्रशासनिक सेवा में खास मुकाम हासिल किया है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत रही है। उन्होंने हिंदी साहित्य में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और इसी विषय के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की।
भानु प्रताप सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में यह शामिल है कि उन्होंने वर्ष 2018 से 2020 के बीच लगातार तीन बार यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास की। यह उपलब्धि उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन का बड़ा उदाहरण मानी जाती है। यूपी पीसीएस और यूपीएससी दोनों परीक्षाओं में सफलता हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि लक्ष्य के प्रति समर्पण और लगातार मेहनत सफलता की कुंजी होती है।
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी पहली महत्वपूर्ण पोस्टिंग मुजफ्फरपुर में टाउन एएसपी के रूप में हुई। इस दौरान उन्होंने अपराध और सड़क पर नेतागिरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। आम लोगों को परेशान करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ उन्होंने सीधे मैदान में उतरकर कार्रवाई की। कई मौकों पर उन्हें खुद लाठी लेकर गुंडों के पीछे दौड़ते हुए भी देखा गया। उनकी इसी कार्यशैली के कारण स्थानीय लोगों और पुलिस महकमे में उन्हें ‘लाठीचार्ज एक्सपर्ट’ जैसे नामों से भी जाना जाने लगा।
इसके बाद दानापुर में एएसपी के रूप में तैनाती के दौरान भी भानु प्रताप सिंह ने कई चर्चित और संवेदनशील मामलों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। दिसंबर 2024 में बाहुबली विधायक रीतलाल यादव के भाई पिंकू यादव के खिलाफ की गई कार्रवाई उनकी सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। उस दौरान राजनीतिक दबाव और रसूख के बावजूद उन्होंने कानून के दायरे में रहते हुए ऐसी रणनीति बनाई कि आरोपी को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर होना पड़ा। इस कार्रवाई ने उनकी ‘दबंग’ और ‘निडर’ अधिकारी की छवि को और मजबूत किया।
भानु प्रताप सिंह की कार्यशैली का सबसे बड़ा आधार कानून के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और निष्पक्षता मानी जाती है। वे अक्सर कहते हैं कि पुलिस का पहला कर्तव्य आम जनता में सुरक्षा की भावना पैदा करना और अपराधियों में कानून का डर कायम करना है। यही वजह है कि वे किसी भी कार्रवाई में राजनीतिक या सामाजिक दबाव को महत्व नहीं देते।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी के दौरान भी भानु प्रताप सिंह ने रणनीतिक तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया। समर्थकों के विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद पुलिस टीम ने संयम और सख्ती दोनों का संतुलन बनाए रखा। पूरी कार्रवाई के दौरान किसी बड़े टकराव से बचते हुए उन्होंने गिरफ्तारी को सफल बनाया, जिसे पुलिस महकमे में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार पुलिस में भानु प्रताप सिंह जैसे युवा और ऊर्जावान अधिकारियों की मौजूदगी को कानून व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उनकी अब तक की सेवा यात्रा यह दर्शाती है कि वे न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टि से सक्षम अधिकारी हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने में भी विश्वास रखते हैं। आने वाले समय में भी उनसे इसी तरह की प्रभावी और निष्पक्ष पुलिसिंग की उम्मीद की जा रही है।