Bihar News : बिहार में सम्राट सरकार द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद कई आईपीएस अधिकारियों की नई पोस्टिंग चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी सूची में एक नाम आईपीएस अधिकारी अमित कुमार जैन का भी है, जिन्हें अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में अपर पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर सात साल पुराने सृजन घोटाले की चर्चा तेज हो गई है।


दरअसल, गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक अमित कुमार जैन को आर्थिक अपराध इकाई में अहम जिम्मेदारी दी गई है। यह वही इकाई है जो आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार, घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच करती है। ऐसे में अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि जिस अधिकारी का नाम खुद कभी बिहार के चर्चित सृजन घोटाले की जांच में सामने आया था, उसे आखिर इस महत्वपूर्ण पद पर कैसे तैनात किया गया।


सात साल पहले यह मामला बिहार की राजनीति और प्रशासन में काफी चर्चा में आया था। उस समय दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें दावा किया गया था कि सृजन संस्था के खाते से आईपीएस अमित कुमार जैन और उनके एक रिश्तेदार के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। यह जानकारी सीबीआई जांच से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से सामने आई थी।


रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2017 में अमित कुमार जैन के बैंक खाते में दो अलग-अलग आरटीजीएस ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 15 लाख रुपये भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि 11 अप्रैल 2017 को उनके खाते संख्या 0095104000092108 में छह लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 12 अप्रैल 2017 को उसी खाते में नौ लाख रुपये और भेजे गए थे। दोनों ट्रांजैक्शन सृजन संस्था से जुड़े खाते से किए जाने की बात कही गई थी।


दैनिक भास्कर की उस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि अमित जैन के एक रिश्तेदार के खाते में भी करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस तरह कुल मिलाकर करीब 27 लाख रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया था। खबर सामने आने के बाद उस समय बिहार की राजनीति में भी इसको लेकर काफी बयानबाजी हुई थी और विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए थे।


हालांकि, उस दौरान दैनिक भास्कर ने अमित कुमार जैन का पक्ष भी लिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि उनके खाते में जो रकम आई थी, वह वैध लेनदेन का हिस्सा थी और उसका सृजन घोटाले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह जांच एजेंसियों को पूरी जानकारी उपलब्ध करा चुके हैं और उनके खिलाफ किसी तरह का गलत काम साबित नहीं हुआ है।


दैनिक भास्कर के रिपोर्टर का सवाल -जवाब 


रिपोर्टर: 2013 में आप भागलपुर डीआईजी थे?
अमित: -हां, क्यों, क्या बात हो गई।
 

रिपोर्टर: दरअसल, सृजन के खाते से आपके खाते में दो बार 9 व 6 लाख रुपये आरटीजीएस से गया है। एक बार 11.4.2017 को और दूसरी बार 12.4.2017 को।
अमित: ना..ना। यह सब गलत है।  

रिपोर्टर: भागलपुर में आपके रिलेटिव भी हैं क्या?
अमित: कौन बोल रहा है यह?   

रिपोर्टर: एक रिपोर्ट में है।
अमित: कौन सी जांच रिपोर्ट? 

रिपोर्टर: बैंक व सीबीआई की रिपोर्ट।  
अमित: सब गलत बात है।  

रिपोर्टर: रिपोर्ट में अंकित है। (कमेंट को पढ़कर सुनाया)
अमित: नहीं, नहीं हम किसी राजेश जैन को नहीं जानते हैं। यह कब की बात आप कह रहे हैं? 

रिपोर्टर: 2017 की।


अमित जैन ने तब यह दावा किया था कि जिन पैसों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह निजी वित्तीय लेनदेन का मामला था। उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया था। हालांकि, उस समय यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था और कई दिनों तक मीडिया में चर्चा का विषय बना रहा।


अब एक बार फिर जब बिहार सरकार ने उन्हें आर्थिक अपराध इकाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है, तो पुराने मामले को लेकर चर्चा फिर शुरू हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक लोग इस नियुक्ति पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोग यह तर्क दे रहे हैं कि भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध की जांच करने वाली एजेंसी में ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जिसका नाम पहले किसी चर्चित घोटाले से जुड़ चुका हो।


हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं प्रशासनिक हलकों में इसे सामान्य तबादला प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। लेकिन इतना तय है कि अमित कुमार जैन की नई पोस्टिंग के साथ सृजन घोटाले का पुराना मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।