Bihar News: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ती घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत सीमांचल क्षेत्र के अररिया और किशनगंज जिलों के 34 सीमावर्ती गांवों में अत्याधुनिक वॉच टावर बनाए जाएंगे। ये टावर सिर्फ निगरानी के लिए ही नहीं, बल्कि इनमें सायरन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सीमा पिलरों की निगरानी अब ड्रोन कैमरों के जरिए की जा रही है। सीमांचल से कोसी तक फैली करीब 231 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई पिलर क्षतिग्रस्त या गायब पाए गए हैं। प्रशासन अब इनकी जगह नए सीमा स्तंभ स्थापित करने का काम तेज़ी से कर रहा है। प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार के अनुसार, बॉर्डर मैनेजमेंट के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत लागू की जा रही है। किशनगंज जिले के चार प्रखंडों के 22 गांव और अररिया जिले के तीन प्रखंडों के 12 गांव इस योजना में शामिल किए गए हैं। इन गांवों में सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष अनुदान भी दिया जाएगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर मई के पहले सप्ताह में दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इससे पहले ही पटना से लेकर किशनगंज तक प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इंडो-नेपाल बॉर्डर का यह इलाका घुसपैठ और तस्करी के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है।
वॉच टावर बनने के बाद सुरक्षा बल दूर से ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे और किसी भी खतरे की स्थिति में सायरन के जरिए पूरे इलाके को तुरंत सतर्क किया जा सकेगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।