Bihar News: पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में एमबीबीएस पूरक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और कथित धांधली मामले में संस्थान प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह एमबीबीएस छात्रों को चार सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई छात्र अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
निलंबित छात्रों में वर्ष 2022 बैच के अभिजीत कुमार, अंकित चंद्रा और यश राज सिन्हा तथा वर्ष 2023 बैच के अमित कुमार, अविनाश प्रकाश और सुमित कुमार शामिल हैं। सभी छात्रों को छात्रावास खाली कर बाहर रहने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, यदि ये छात्र एमबीबीएस परीक्षा में टॉपर भी होते हैं तो उन्हें किसी प्रकार का पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। हालांकि, मामले में अब तक संस्थान प्रशासन की ओर से कोई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं कराई गई है।
27 अप्रैल को रद्द की गई थी पूरक परीक्षा
जांच समिति ने 27 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा में धांधली की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर आईजीआईएमएस प्रशासन ने उसी दिन परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके साथ ही परीक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों और एमबीबीएस के सात छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संबंधित छात्रों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया।
जांच के लिए बनाई गईं तीन समितियां
मामले की विस्तृत जांच के लिए 5 मई को आईजीआईएमएस प्रशासन ने तीन अलग-अलग समितियों का गठन किया। पहली समिति छात्रों के जवाब और कारण बताओ नोटिस पर रिपोर्ट तैयार करेगी। दूसरी समिति भविष्य में कदाचार मुक्त परीक्षा कराने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगी, जबकि तीसरी समिति पूरी परीक्षा प्रक्रिया का अध्ययन कर सुधार संबंधी सुझाव देगी।
ई-मेल शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की सप्लीमेंट्री परीक्षा दिसंबर 2025 में आयोजित हुई थी, जिसमें लगभग 130 छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद एक अज्ञात ई-मेल के माध्यम से धांधली की शिकायत मिलने पर अप्रैल के पहले सप्ताह में आईजीआईएमएस प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। प्रभारी निदेशक सह डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार की अध्यक्षता में गठित इस समिति में डॉ. विभूति सिन्हा, प्रफुल्ल रंजन और आईजीआईएमएस के रजिस्ट्रार डॉ. सर्वेश शामिल थे।
जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि परीक्षा को पूरी तरह कदाचार मुक्त नहीं माना जा सकता और गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों के साथ छेड़छाड़ की संभावना भी जताई गई।
प्रारंभिक जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उत्तर पुस्तिका पर तीन स्थानों पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। कुछ छात्रों की कॉपियों में आगे और पीछे किए गए हस्ताक्षर एक जैसे पाए गए, जबकि बीच के पन्ने पर किए गए हस्ताक्षर अलग थे। इसे जांच में महत्वपूर्ण अनियमितता माना गया, जिसके बाद संस्थान ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की।