बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के अध्यक्ष और 2011 बैच के आईएएस अधिकारी त्यागराजन एसएम के करियर में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। बिहार सरकार ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार में उन्हें सहकारिता मंत्रालय में निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ही त्यागराजन एसएम को उनके नए पद पर प्रभार ग्रहण करने की तारीख से बिहार सरकार की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।


त्यागराजन एसएम का प्रशासनिक सफर कई मायनों में खास रहा है। मेडिकल की पढ़ाई से लेकर पुलिस सेवा और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर बताता है कि उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव हासिल करते हुए प्रशासनिक सेवा में अपनी अलग पहचान बनाई। अब केंद्र में सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके अनुभवों के लिए एक और महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।


तमिलनाडु के कोयंबटूर से आने वाले त्यागराजन एसएम ने डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी, चेन्नई से मेडिसिन में एमबीबीएस की पढ़ाई की है। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की राह पकड़ी। बताया जाता है कि वर्ष 2010 में उनका भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयन हुआ था। इसके बाद उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम किया। पुलिस सेवा के दौरान प्रशासन और कानून-व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को समझने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और अगले ही साल 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हो गए। उन्हें बिहार कैडर मिला।


बिहार कैडर में आने के बाद त्यागराजन एसएम ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। अलग-अलग जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने के दौरान उन्होंने फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन पर खास पकड़ बनाई। गया, दरभंगा और पटना जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर उनकी तैनाती रही। इसके अलावा उन्होंने एडिशनल डायरेक्टर जनरल समेत कई अहम पदों पर भी जिम्मेदारी निभाई।


गया में जिलाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल खास तौर पर चर्चा में रहा। गया में आयोजित होने वाले पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, साफ-सफाई, यातायात, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती हैं। त्यागराजन एसएम के कार्यकाल में पितृपक्ष मेले की व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी कई पहल की गईं।


उनके कार्यकाल से जुड़ी तकनीक आधारित पहलों में 'वंडर ऐप' और 'श्रवण श्रुति' जैसी पहल का भी उल्लेख किया जाता है। इन प्रयासों का उद्देश्य आम लोगों तक सरकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाना था। यही वजह है कि फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों के बीच त्यागराजन एसएम की पहचान केवल एक प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि नई सोच के साथ काम करने वाले अधिकारी के रूप में भी बनी।


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। परीक्षा व्यवस्था, आवेदन प्रक्रिया, रिजल्ट और बोर्ड से जुड़ी तमाम प्रशासनिक गतिविधियों के बीच बीएसईबी जैसा बड़ा संस्थान संभालना अपने आप में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है। अब केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के बाद उनकी प्रशासनिक यात्रा का फोकस राष्ट्रीय स्तर पर होगा।


सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के रूप में त्यागराजन एसएम को केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी। सहकारिता क्षेत्र का दायरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान, समितियों और स्थानीय स्तर की संस्थाओं तक फैला हुआ है। ऐसे में बिहार जैसे बड़े राज्य में लंबे समय तक फील्ड प्रशासन का अनुभव रखने वाले अधिकारी के लिए यह जिम्मेदारी काफी अहम मानी जा रही है।


एक मेडिकल प्रोफेशनल के रूप में करियर की शुरुआत, फिर पुलिस सेवा और उसके बाद आईएएस अधिकारी के तौर पर बिहार में लंबी प्रशासनिक पारी—त्यागराजन एसएम का सफर अपने आप में अलग है। अब केंद्र में नई जिम्मेदारी के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका प्रशासनिक अनुभव सहकारिता मंत्रालय के कामकाज में किस तरह दिखाई देता है।