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20-Mar-2026 08:30 AM
By First Bihar
Bihar News : राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जीरो टॉलरेंस नीति को अब हाईटेक ताकत मिल गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने घूसखोर अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया है। इसी कड़ी में करीब 7 लाख रुपये की लागत से ‘ओपन टेक्स्ट फॉरेंसिक इमेजर’ मशीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है, जो जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
यह अत्याधुनिक मशीन जब्त किए गए पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का हूबहू डिजिटल क्लोन तैयार करती है। खास बात यह है कि एक बार डेटा इस मशीन में सुरक्षित हो जाने के बाद उसमें किसी भी तरह का बदलाव संभव नहीं होता। इससे न केवल साक्ष्य सुरक्षित रहते हैं, बल्कि अदालत में उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ जाती है।
निगरानी विभाग के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से अब अदालतों में लंबे समय तक चलने वाले मामलों और ‘तारीख पर तारीख’ की समस्या पर लगाम लगेगी। डिजिटल साक्ष्य के कारण जांच और ट्रायल दोनों की गति तेज होगी। यही वजह है कि अब मामलों को समय सीमा के भीतर निपटाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
2025 में रिकॉर्ड सजा: 25 साल में पहली बार बड़ी कार्रवाई
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का असर अब साफ दिखने लगा है। पिछले 25 वर्षों में पहली बार वर्ष 2025 में सबसे अधिक 29 घूसखोर अधिकारियों और कर्मचारियों को सजा सुनाई गई। इसके पीछे कई विभागों की संयुक्त और सतत मॉनिटरिंग को बड़ी वजह माना जा रहा है।
गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, अभियोजन निदेशालय और निगरानी ब्यूरो के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। गवाहों की समय पर पेशी सुनिश्चित की गई और विशेष लोक अभियोजकों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में मजबूत पक्ष रखा। इससे मामलों में देरी कम हुई और दोषियों को सजा दिलाना संभव हुआ।
200 भ्रष्ट अधिकारियों की ‘डिजिटल कुंडली’ तैयार
निगरानी ब्यूरो ने इस हाईटेक मशीन की मदद से करीब 200 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर ली है। इन मामलों में पुराने और नए दोनों तरह के केस शामिल हैं। इनमें से 91 मामले पुराने हैं, जबकि बाकी पिछले एक-दो वर्षों में दर्ज किए गए हैं।
इन सभी मामलों की सूची निगरानी अदालत को सौंप दी गई है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई हो सके। इसके साथ ही जांच टीम को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि समय पर चार्जशीट दाखिल की जाए और केस डायरी पूरी सटीकता से तैयार की जाए।
स्पेशल टीम और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती
इस हाईटेक सिस्टम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए विशेषज्ञों और तकनीशियनों की विशेष टीम बनाई गई है। इसके अलावा स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित करने के लिए एसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई है, जिसमें डीएसपी, इंस्पेक्टर समेत करीब 10 अधिकारी शामिल हैं। यह टीम जांच से लेकर कोर्ट में पैरवी तक हर स्तर पर समन्वय स्थापित कर रही है। साथ ही लोक अभियोजकों के साथ मिलकर केस को मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है।
सरकार का सख्त रुख, बढ़ाए गए संसाधन
सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान को और तेज करने के लिए निगरानी ब्यूरो को अतिरिक्त अधिकारी और संसाधन उपलब्ध कराए हैं। डीजी निगरानी जितेंद्र सिंह गंगवार के नेतृत्व में विभाग लगातार तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को लागू कर रहा है।
कुल मिलाकर, डिजिटल तकनीक के इस नए प्रयोग से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में न तो सबूतों से छेड़छाड़ संभव होगी और न ही जांच प्रक्रिया में देरी। आने वाले समय में यह व्यवस्था घूसखोरों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।