BIHAR NEWS : जेडीयू सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल कल समाप्त हुआ था। अब उन्हें राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है।बता दें कि भारत में राष्ट्रपति कोटे से राज्यसभा में कुल 12 सदस्य मनोनीत किए जाते हैं। इन सदस्यों को साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।


इससे पहले हरिवंश को जेडीयू ने अपने कोटे से राज्यसभा नहीं भेजा था। हरिवंश दो बार जेडीयू की ओर से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। इस बार जेडीयू ने उन्हें मैदान में नहीं उतारा था और नीतीश कुमार के साथ साथ रामनाथ ठाकुर को राज्यसभा भेजा है। 


दरअसल, हरिवंश नारायण सिंह जेडीयू के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ राज्यसभा के उपसभापति के पद पर भी रह चुके हैं। उनके शांत स्वभाव, संसदीय मर्यादा और संचालन क्षमता को देखते हुए उन्हें सभी दलों में सम्मान की नजर से देखा जाता है। यही वजह है कि जब जेडीयू ने इस बार उन्हें अपने कोटे से राज्यसभा नहीं भेजा, तब भी उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता बनी रही।


बिहार की राजनीति में इस बार कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। जेडीयू ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों में बदलाव करते हुए नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को मैदान में उतारा। ऐसे में यह माना जा रहा था कि हरिवंश का राज्यसभा सफर यहीं खत्म हो सकता है। लेकिन राष्ट्रपति कोटे से उनके मनोनयन ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।


भारत में राज्यसभा के लिए राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्यों को मनोनीत करने का प्रावधान है। ये वे लोग होते हैं जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला या सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो। हरिवंश नारायण सिंह का नाम भी इसी सूची में शामिल किया गया है, जो उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और पत्रकारिता से लेकर राजनीति तक के अनुभव को दर्शाता है।


हरिवंश पहले भी दो बार जेडीयू की ओर से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उपसभापति के रूप में उनकी कार्यशैली को अक्सर संतुलित और निष्पक्ष माना गया है। ऐसे में उनका दोबारा राज्यसभा में आना संसद के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।


कुल मिलाकर, जेडीयू से टिकट नहीं मिलने के बावजूद हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा में बने रहना यह साबित करता है कि उनकी राजनीतिक और संसदीय पकड़ आज भी मजबूत है। आने वाले समय में वे एक बार फिर सदन की कार्यवाही में अहम भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।