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28-Feb-2026 10:29 AM
By First Bihar
Road Safety India : अगर आप सड़क पर गाड़ी चलाते समय ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेते हैं तो अब सावधान हो जाइए। देश में सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि जल्द ही भारत में ‘ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम’ लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत अब केवल जुर्माना भरकर छूट पाना आसान नहीं होगा, बल्कि नियम तोड़ने पर आपके ड्राइविंग लाइसेंस पर सीधे असर पड़ेगा।
क्या है ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम?
नया सिस्टम ड्राइविंग लाइसेंस को एक तरह के “रिपोर्ट कार्ड” की तरह काम करने वाला बनाएगा। अभी तक ट्रैफिक नियम तोड़ने पर आमतौर पर चालान काटा जाता है और जुर्माना वसूला जाता है। लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था में हर ड्राइवर के लाइसेंस से एक निश्चित संख्या में अंक (पॉइंट्स) जुड़े रहेंगे।
जब भी कोई चालक ट्रैफिक नियम तोड़ेगा, उसके लाइसेंस से तय संख्या में पॉइंट्स काट लिए जाएंगे। यह कटौती गलती की गंभीरता के आधार पर होगी। जैसे—ओवरस्पीडिंग पर अलग अंक कटेंगे, जबकि शराब पीकर गाड़ी चलाने पर अधिक अंक घटाए जा सकते हैं।
कैसे होगा लाइसेंस सस्पेंड?
इस सिस्टम में एक न्यूनतम अंक सीमा तय की जाएगी। यदि किसी ड्राइवर के पॉइंट्स उस सीमा से नीचे चले जाते हैं, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकता है। यानी वह व्यक्ति उस अवधि में वाहन नहीं चला सकेगा।
यदि सस्पेंशन के बाद भी चालक अपने व्यवहार में सुधार नहीं करता और बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है। यह कदम खासकर उन लोगों के लिए बड़ा झटका साबित होगा जो बार-बार ट्रैफिक कानूनों की अनदेखी करते हैं।
किन-किन उल्लंघनों पर कटेंगे अंक?
नए सिस्टम का दायरा व्यापक होगा और लगभग सभी प्रमुख ट्रैफिक उल्लंघनों को इसमें शामिल किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से:
ओवरस्पीडिंग
ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल
रॉन्ग साइड ड्राइविंग
रेड लाइट जंप करना
बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाना
शराब पीकर वाहन चलाना
इन सभी मामलों में अलग-अलग स्तर के अंक काटे जा सकते हैं। गंभीर अपराधों में अधिक अंक कटेंगे, जिससे लाइसेंस जल्दी सस्पेंड होने की स्थिति बन सकती है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
भारत में सड़क हादसों की संख्या लगातार चिंता का विषय रही है। हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जुर्माना बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता।ग्रेड-आधारित सिस्टम का उद्देश्य ड्राइवरों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ाना है। जब लोगों को यह एहसास होगा कि हर गलती उनके लाइसेंस पर दर्ज हो रही है और इससे उनका ड्राइविंग अधिकार छिन सकता है, तो वे नियमों का पालन अधिक गंभीरता से करेंगे।
डिजिटल मॉनिटरिंग होगी अहम
सरकार इस सिस्टम को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी में है। ई-चालान और ट्रैफिक कैमरों के जरिए दर्ज उल्लंघन सीधे ड्राइवर के रिकॉर्ड में जुड़ेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्रवाई में देरी की संभावना कम होगी। भविष्य में ड्राइवर अपने पॉइंट्स की स्थिति ऑनलाइन भी देख सकेंगे। इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि वे कितने जोखिम की स्थिति में हैं।
क्या होगा आम लोगों पर असर?
साधारण और जिम्मेदार ड्राइवरों के लिए यह सिस्टम फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि इससे सड़कें सुरक्षित होंगी। वहीं नियमों को हल्के में लेने वालों के लिए यह चेतावनी है कि अब हर गलती की कीमत सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि ड्राइविंग अधिकार से चुकानी पड़ सकती है।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम देश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि इसे कब और किस रूप में लागू किया जाता है, लेकिन इतना तय है कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है।