Bihar News: बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत विभागीय जांच निदेशालय के मुख्य जांच आयुक्त सह महानिदेशक दीपक कुमार सिंह ने कहा कि आचार संहिता के अनुसार किसी भी सरकारी सेवक के खुद का संपत्ति अर्जित करने और उस संपत्ति का सरकार को प्रतिवेदन देने संबंधी नियमों की अनदेखी ही अनुशासनिक कार्रवाई का आधार होगा। 


वह शुक्रवार को शास्त्रीनगर स्थित रेवेन्यू सर्वे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय की ओर से बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005 के अनुप्रयोग संबंधी प्रशिक्षण सत्र को संबोधित कर रहे थे। प्रशिक्षण सत्र में योजना एवं विकास विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के संवर्गीय पदाधिकारी (बिप्रसे एवं बिससे के अतिरिक्त) मौजूद थे।


इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि दीपक कुमार सिंह ने आय से अधिक संपत्ति और निगरानी के मामले में आरोप पत्र का गठन, साक्ष्य तैयार करने और मामले की जांच करने आदि की बारीकियों से पदाधिकारियों को रूबरू कराया। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026 में जारी किए गए तीन परिपत्रों के बारे में जानकारी देते हुए सरकारी सेवक के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने से लेकर अंतिम आदेश पारित किए जाने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी।


प्रशिक्षक सतीश तिवारी ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों को भ्रष्टाचार के अलग-अलग श्रेणियों से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि कार्यालयी संबंध रखने वाला या बिना ख्याति प्राप्त व्यक्ति से फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन करने के लिए विधिक प्राधिकारी से अनुमति लेने की जरूरत होगी। उन्होंने उदाहरण के तौर पर कहा कि पंजीकृत व्यापारी या बिल्डर से जमीन खऱीदने से पहले अनुमति की जरूरत नहीं है लेकिन किसी किसान या फिर दूसरी परिस्थितियों में जमीन की खरीदी करने पर विधिक प्राधिकारी से अनुमति लेने की जरूरत है। 


उन्होंने कहा कि सरकारी सेवक खुद या परिवार के सदस्यों के नाम से दो महीने के मूल वेतन से ज्यादा का कोई भी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन करता है तो ट्रांजेक्शन संबंधी सूचना एक महीने के भीतर विधिक प्राधिकारी को देना होगा। उन्होंने प्रीति दान के तहत उपहार लेने और देने के मामले में तय की गई श्रेणियों से भी रूबरू किया। इस अवसर पर  शालिग्राम पाण्डे एवं भगवान साहू ने भी बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005 के अनुप्रयोग संबंधी बारीकियों से अवगत कराया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव प्रभात कुमार के साथ दूसरे कई पदाधिकारी मौजूद रहे।