Bihar News : पान मसाला खाने वालों के लिए जरूरी खबर है। पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री को बढ़ावा देना है। इसके तहत पान मसाला उत्पादों की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर स्पष्ट मानक तय किए गए हैं।
पान मसाला लंबे समय से देश में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख पैकेज्ड उत्पादों में शामिल है। इसकी छोटी-छोटी पुड़िया और पाउच बाजार में बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। ऐसे में इनकी पैकेजिंग से निकलने वाला कचरा पर्यावरण के लिए चुनौती बनता रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब पैकेजिंग सामग्री को लेकर नए नियमों पर जोर दिया गया है।
पैकेजिंग में प्लास्टिक पर रोक की दिशा में कदम
नए प्रावधानों में पान मसाला की पैकेजिंग के लिए ऐसी सामग्री के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है जो प्लास्टिक-मुक्त हो। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को पैकेजिंग तैयार करते समय निर्धारित पर्यावरण-अनुकूल सामग्री और मानकों का पालन करना होगा।
FSSAI की ओर से तैयार किए गए प्रावधानों में पैकेजिंग के लिए स्वीकार्य सामग्री और उससे जुड़े मानकों को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। इसका असर पान मसाला बनाने और बेचने वाली कंपनियों की पैकेजिंग प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
क्यों जरूरी हुआ बदलाव?
प्लास्टिक पैकेजिंग से पैदा होने वाला कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है। छोटे पाउच और रैपर बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने के कारण इनके निपटारे की समस्या भी सामने आती है। सड़क, नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर फेंके जाने वाले ऐसे पैकेट कचरे की समस्या को बढ़ाते हैं।
इसी वजह से खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग में पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने की कोशिश लगातार की जा रही है। पान मसाला जैसे बड़े पैमाने पर पैक होकर बिकने वाले उत्पादों की पैकेजिंग में बदलाव को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
नए नियमों के लागू होने के बाद पान मसाला कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था की समीक्षा करनी पड़ सकती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री तय मानकों के अनुरूप हो। पैकेजिंग डिजाइन, उत्पादन प्रक्रिया और सामग्री की खरीद से लेकर तैयार उत्पाद तक इसका असर देखने को मिल सकता है।
इस बदलाव से कंपनियों की लागत और उत्पादन प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए मानकों के तहत कौन-कौन सी सामग्री स्वीकार्य होती है और कंपनियां उन्हें किस तरह अपनाती हैं।
पहले मांगी गई थीं आपत्तियां और सुझाव
इन प्रावधानों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए थे। इसका उद्देश्य नियमों को लागू करने से पहले उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों की राय को समझना था।
माना जा रहा है कि विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद पैकेजिंग से जुड़े प्रावधानों को अधिक स्पष्ट रूप दिया गया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कंपनियां इन नए मानकों को किस तरह लागू करती हैं और बाजार में इसका असर कब से दिखाई देना शुरू होता है।
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव पान मसाला के पैकेट के स्वरूप और पैकेजिंग सामग्री में दिखाई दे सकता है। उत्पाद की कीमत, उपलब्धता या अन्य पहलुओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह कंपनियों द्वारा नए नियमों को अपनाने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर FSSAI का यह कदम खाद्य उत्पादों के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में बाजार में प्लास्टिक-मुक्त या कम प्लास्टिक वाली पैकेजिंग के नए विकल्प देखने को मिल सकते हैं।