Bihar Flood Alert: नेपाल और बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य में बाढ़ का खतरा गंभीर कर दिया है। महानंदा, कोसी और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने के कारण पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और सुपौल समेत कई जिलों में बाढ़ की आशंका गहरा गई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पूर्णिया जिले के डेंगराह और कटिहार क्षेत्र में शनिवार को महानंदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण बायसी अनुमंडल के निचले इलाकों और दीयारा क्षेत्रों के खेतों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। इससे सीमावर्ती गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने संवेदनशील तटबंधों पर चौबीसों घंटे निगरानी बढ़ा दी है।
महानंदा उप प्रमंडल, पूर्णिया केंद्रीय जल आयोग (CWA) के अधिकारी अमर कुमार और बायसी के एसडीएम अभिषेक रंजन ने बताया कि नेपाल और पश्चिम बंगाल से भारी मात्रा में पानी आने के कारण नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में महानंदा नदी के जलस्तर में 175 सेंटीमीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पिछले तीन से चार दिनों में यह वृद्धि 200 सेंटीमीटर से अधिक रही है।
महानंदा के उफान का असर कटिहार जिले के कदवा प्रखंड में भी देखने को मिला है। लिलजी धार में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है, जिससे धनगामा, शर्मा टोला और यादव टोला सहित दर्जनों गांवों का मुख्य बाजार से सड़क संपर्क टूट गया है। हालांकि, कार्यपालक अभियंता कृपानाथ चंद्र विश्वास ने कहा कि फिलहाल पानी खेतों तक ही सीमित है और रिहायशी इलाकों को सुरक्षित रखने के लिए कटाव निरोधी कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
महानंदा के साथ-साथ कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर भी उत्तर बिहार की चिंता बढ़ा रहा है। सुपौल के वीरपुर स्थित कोसी बराज पर इस मानसून सीजन में पहली बार जलप्रवाह 50 हजार क्यूसेक के आंकड़े को पार कर गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शनिवार दोपहर तीन बजे कोसी बराज पर 57,435 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
मुख्य अभियंता (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण) संजीव शैलेश ने बताया कि आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सभी इंजीनियरों और कर्मियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। विभाग ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को चौबीसों घंटे अपने कार्यस्थल पर तैनात रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।
बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। तटबंधों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।