अरवल: बिहार सरकार ने बालू के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। ऑफ सीजन में नदी से चोरी-छिपे बालू निकालकर उसका अवैध भंडारण करने वालों पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम लगातार शिकंजा कस रही है। इसी क्रम में अरवल जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1 लाख 32 हजार घनफीट अवैध रूप से भंडारित बालू जब्त किया गया है। जब्त बालू का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये बताया गया है।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि बालू के अवैध कारोबार में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। खासकर बालू के ऑफ सीजन यानी 15 जून से 15 अक्टूबर के बीच अवैध खनन और भंडारण पर विशेष नजर रखी जा रही है।
ऑफ सीजन में चोरी-छिपे खनन पर सरकार की नजर
सरकारी जानकारी के अनुसार, बालू के ऑफ सीजन के दौरान अवैध कारोबार से जुड़े लोग नदी से चोरी-छिपे बालू का खनन कर उसका बड़े पैमाने पर भंडारण करते हैं। बाद में इसी बालू को अवैध तरीके से बेचकर भारी मुनाफा कमाने का प्रयास किया जाता है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और खनन नियमों का भी उल्लंघन होता है।
ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अपर पुलिस महानिदेशक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। पुलिस अधीक्षक (प्रशासन) के नेतृत्व में गठित यह टीम खनन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर अलग-अलग जिलों में कार्रवाई कर रही है।
अरवल के कोरियम बालू घाट पर बड़ी कार्रवाई
दिनांक 19 और 20 अगस्त 2026 को आर्थिक अपराध इकाई बिहार, पटना की टीम ने खनन विभाग और स्थानीय पुलिस-प्रशासन के सहयोग से अरवल जिले में जांच अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान कोरियम बालू घाट के सेकेंडरी भंडारण स्थल पर बड़े पैमाने पर अवैध रूप से जमा बालू मिला।
जांच के बाद कुल 1,32,000 घनफीट बालू को जब्त कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस बालू का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये है। इतनी बड़ी मात्रा में अवैध भंडारण मिलने के बाद बालू कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
7 बालू घाटों के सेकेंडरी लोडिंग स्थलों की भी जांच
कार्रवाई केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रही। जांच दल ने अरवल जिले के कोरियम, असलामपुर, दुल्लाह, अहियापुर और सोहसा समेत कुल 7 बालू घाटों के सेकेंडरी लोडिंग स्थलों की भी जांच की। खनन विभाग के सहयोग से इन स्थानों पर भंडारित बालू का भौतिक निरीक्षण किया गया। इसके साथ ही पूरे इलाके की जीआईएस मैपिंग और ड्रोन मैपिंग भी कराई गई है। जांच एजेंसियां अब जमीन पर मिले आंकड़ों और ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों व डाटा का मिलान करेंगी।
ड्रोन मैपिंग से प्राप्त स्थलीय डाटा की रिपोर्ट आने के बाद उसका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। यदि जांच में अवैध भंडारण, खनन या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अन्य जिलों में भी जारी है कार्रवाई
आर्थिक अपराध इकाई की ओर से केवल अरवल में ही नहीं, बल्कि बिहार के अन्य जिलों में भी अवैध बालू भंडारण और कारोबार की जांच की जा रही है। जांच दल स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग के साथ मिलकर ऐसे स्थानों की पहचान कर रहा है, जहां ऑफ सीजन के दौरान चोरी-छिपे बालू जमा किए जाने की आशंका है।
सरकार का मानना है कि अवैध खनन और भंडारण के कारण एक ओर पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है तो दूसरी ओर सरकारी राजस्व को भी भारी क्षति होती है। यही कारण है कि अब केवल अवैध खनन ही नहीं, बल्कि अवैध रूप से जमा किए गए बालू के भंडार पर भी विशेष कार्रवाई की जा रही है।
अरवल में 1.63 करोड़ रुपये मूल्य के बालू की जब्ती को इस अभियान की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ड्रोन और जीआईएस मैपिंग से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही अन्य जिलों में भी अवैध बालू कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की संभावना है।