Bihar Bus Fare: दिवाली और छठ महापर्व के नजदीक आते ही बिहार जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ने लगी है। त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौटते हैं, जिससे ट्रेन और बसों में टिकटों की मांग बढ़ जाती है। वहीं, फ्लाइट का किराया भी कई यात्रियों के बजट से बाहर हो जाता है। ऐसे में ट्रेन का कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर प्राइवेट बसों से सफर करने वाले लोगों को अब सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।




दिल्ली-NCR से बिहार जाने वाली प्राइवेट बसों का किराया त्योहारों के दौरान बढ़कर 2,500 से 4,000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, प्रीमियम लग्जरी बसों का टिकट 9,999 रुपये तक बताया जा रहा है। इससे त्योहार पर घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।




दिवाली और छठ के दौरान बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से बसों के किराये में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में दिल्ली-NCR से बिहार जाने वाली प्राइवेट बसों का किराया लगभग 800 से 2,000 रुपये के बीच रहता है। हालांकि, त्योहारों के दौरान यही किराया बढ़कर 2,500 से 4,000 रुपये तक पहुंच सकता है। यानी सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों को काफी अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। वास्तविक किराया बस ऑपरेटर, यात्रा की तारीख, सीट की उपलब्धता और बस की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।




प्राइवेट बसों के अलावा प्रीमियम और लग्जरी बसों से सफर करने वाले यात्रियों को भी अधिक किराया देना पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ प्रीमियम लग्जरी बसों का टिकट 9,999 रुपये तक पहुंच गया है। त्योहारों के दौरान जैसे-जैसे सीटों की मांग बढ़ती है, कम कीमत वाले टिकट जल्दी बुक हो जाते हैं। इसके बाद यात्रियों के पास महंगे टिकट खरीदने के विकल्प ही बचते हैं। ऐसे में आखिरी समय पर टिकट बुक करने वालों को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।




दिवाली और छठ के दौरान हर साल बिहार जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे स्पेशल ट्रेनों का परिचालन भी करता है। वर्ष 2026 में भी बिहार के लिए कई स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद त्योहारों के समय यात्रियों की मांग अधिक होने के कारण कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कई लोग प्राइवेट बसों का विकल्प चुनते हैं। बसों में भी सीटों की मांग बढ़ने से किराया महंगा हो जाता है। 




दिवाली और छठ बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल हैं। इस दौरान दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोग और विद्यार्थी बड़ी संख्या में अपने घर लौटते हैं। यात्रियों की इसी बढ़ती मांग के बीच बसों के किराये में भी अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में यात्रा की योजना पहले बनाना, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करना और टिकट बुक करने से पहले सभी शुल्कों की जांच करना जरूरी है। इससे अनावश्यक खर्च से बचने में मदद मिल सकती है।