PATNA: कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI), बिहार चैप्टर द्वारा सफलतापूर्वक 4 वां वार्षिक सम्मेलन BIC 2026 का आयोजन शनिवार 13 जून को पटना के होटल मौर्या में किया गया। जिसमें क्षेत्र के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।


उद्घाटन समारोह, जो शाम 6:45 बजे से 7:15 बजे तक आयोजित हुआ, अत्यंत उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन (समारोहिक दीप जलाकर) के साथ किया गया, जो हृदय रोग विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान एवं प्रगति के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। उद्घाटन में मुख्य अतिथि डॉ. एस. एस. चटर्जी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. कृष्ण कुमार आर. डॉ. संजीव कुमार, अध्यक्ष, CSI बिहार चैप्टर, डॉ. शमशाद आलम, आयोजन सचिव, डॉ. प्रमोद कुमार, आयोजन अध्यक्ष ने सम्मिलित रूप से किया। डॉ. अशोक कुमार, सचिव, CSI बिहार, CSI के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ अरविंद कुमार एवं डॉ बी. बी. भारती सहित अन्य प्रतिष्ठित चिकित्सकों एवं संकाय सदस्यों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। समारोह में बिहार एवं देश के अन्य भागों से आए प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


इस सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा पेशेवरों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, कौशल विकास एवं आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है, जिससे बिहार में हृदय रोग उपचार की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके। सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्र दोपहर 2 बजे से रात 11:30 बजे तक आयोजित किए गए, जिनमें विचारोत्तेजक चचर्चाएँ, शैक्षणिक प्रस्तुतियों एवं कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसका उद्देश्य रोगियों की देखभाल एवं क्लिनिकल परिणामों में सुधार लाना है। 


समारोह को संबोधित करते हुए सीएसआई बिहार चैप्टर के अध्यक्ष एवं एम्स पटना के कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि पिछले दो दशकों में चिंताजनक रूप से हृदय रोगियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। भारत वर्ष में पूरे विश्व के हृदय रोगियों का लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक रहता है। लेकिन इसके साथ ही तकनीकी प्रगति के कारण हृदय रोगों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव आया है और आज कार्डियक सर्जरी एवं कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में भारत का नाम पूरे विश्व में अव्वल देशों में शामिल है।


 उन्होंने बताया कि कैथेटर आधारित नवीन इंटरवेंशनल तकनीकों (तार के जरिए इलाज) के विकास से अब अधिकांश मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी में जाने से बच जाते हैं और जटिल से जटिल कार्डियक कॉम्प्लेक्स डिजीज का उपचार भी कैथ लैब में सफलतापूर्वक किया जा रहा है। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. एस.एस. चटर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में इंटरवेंशनल का वार्षिक सम्मेलन आयोजित होना यह दिखाता है कि इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में बिहार में काफी सुविधाएं बढ़ी हैं और देश के किसी भी अन्य भागों की तुलना में यहाँ बराबर काम होता है। 


उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि आपातकालीन स्थिति में अगर हार्ट अटैक हो जाए, तो समय पर 'गोल्डन ऑवर' के भीतर प्राथमिक एंजियोप्लास्टी (प्राइमरी एंजियोप्लास्टी) कर दी जाएगी और स्टेंट लगा दी जाए, तो मरीज की जान तो बचती ही है, उसके हार्ट की भी रक्षा होती है और हार्ट पहले की तरह मजबूत हो जाता है। सीएसआई बिहार चैप्टर को धन्यवाद देते हुए डॉक्टर चटर्जी ने कहा कि वे शुरू से इस संगठन से जुड़े हुए हैं और डॉ. ठाकुर के साथ इसे बढ़ते हुए देखा है। आज बड़ी खुशी की बात है कि नई पीढ़ी ने इतनी प्रगति कर ली है कि इतने बड़े समागम का आयोजन बिहार में हो रहा है।


देश के जाने-माने पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट कोच्चि के डॉ. कृष्ण कुमार आर.ने बताया कि बिहार आकर उन्हें हमेशा बेहद खुशी होती है। वे पिछले 25 सालों से लगातार बिहार आ रहे हैं और कई अस्पतालों में उन्होंने बच्चों की इंटरवेंशन सर्जरी भी की है। उन्होंने कहा कि इंटरवेंशन और कैथ लैब तकनीक से बच्चों के इलाज में जैसे कि हार्ट में छेद होना या हार्ट की मुख्य नलियों का उल्टा हो जाना, उसमें भी अब बिना बड़ी सर्जरी के इंटरवेंशन से इलाज किया जा सकता है। उन्होंने युवा कार्डियोलॉजिस्टों और चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों में ज्यादा से ज्यादा गुर हासिल करें जिससे मरीजों को फायदा हो सके।



उद्घाटन समारोह में आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि कार्डियोलॉजिस्टों का अब समाज के प्रति दायित्व है कि वे चौबीसों घंटे तत्पर रहें, क्योंकि हार्ट अटैक या हार्ट फेल्योर किसी भी मरीज पर कब आक्रमण करेगा, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने बल दिया कि राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में 24 घंटे कैथ लैब की सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए ताकि हार्ट अटैक के केस में यह जीवन रक्षक सुविधा समय पर मिल सके। इस सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए सीएसआई बिहार चैप्टर और बिहार सरकार दोनों मिलकर प्रयासरत हैं और कई नए केंद्र खुल रहे हैं जो बड़ी खुशी की बात है।


सम्मेलन के वैज्ञानिक अध्यक्ष (साइंटिफिक चेयरमैन) डॉ. शाहीन अहमद ने इस कॉन्फ्रेंस को अत्यंत सफल बताते हुए कहा कि इसके साइंटिफिक सेमिनार इस तरह तैयार किए गए थे कि जिस क्षेत्र में जो विशेषज्ञ हैं, उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला। सम्मेलन में जटिल जन्मजात हृदय रोग (कॉम्प्लेक्स कंजेनिटल हार्ट डिजीज), मल्टी-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज और कैथेटर के माध्यम से हार्ट वाल्व को बदलना जैसे विषयों पर अलग-अलग विशेषज्ञ सत्र रखे गए। इसके अतिरिक्त कैथ लैब में उत्पन्न होने वाली गंभीर जटिल परिस्थितियों जैसे 'नाइटमेयर्स इन कैथ लैब' (कैथ लैब के दौरान अचानक आने वाली क्रैश जैसी आपातकालीन स्थिति) के कुशल प्रबंधन और समय रहते उसमें कैसे सुधार किया जाए, इसके बारे में विस्तृत बातचीत की गई, जिससे प्रतिभागी डॉक्टरों को बहुत महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।



सीएसआई नेशनल एग्जीक्यूटिव के सदस्य डॉ. बी.बी. भारती और डॉ. अरविंद कुमार ने भी मौके पर कार्डियोलॉजिस्टों को संबोधित करते हुए कहा कि सीएसआई हमेशा जन-जागरूकता, हृदय रोग से बचाव और इसके सटीक इलाज के लिए निरंतर कार्यरत रही है। नेशनल बॉडी के साथ मिलकर बिहार सीएसआई ने समय-समय पर कई शैक्षणिक एवं सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया है।



अंत में आयोजन सचिव डॉ. शमशाद आलम ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बाहर से आए कार्डियोलॉजिस्टों का आभार व्यक्त किया और कहा कि आपके आने से बिहार में कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में और अधिक समृद्धि हुई है तथा इसी प्रकार के समन्वय से हम आगे भी काम करते रहेंगे ताकि हृदय रोग की नवीन से नवीनतम सुविधाएं हमारे शहर और राज्य में आएं। उन्होंने सम्मेलन में आए सभी डेलिगेट्स, प्रेस व मीडिया कर्मियों, सुदूर व ग्रामीण क्षेत्रों से आए चिकित्सकों और डीएम (DM) व एमसीएच (MCH) कोर्स कर रहे नए डॉक्टरों को विशेष रूप से धन्यवाद दिया और आशा व्यक्त की कि इस कार्यक्रम से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला होगा।



समारोह के मुख्य वैज्ञानिक सत्रों के अंतर्गत कोच्चि के डॉ. कृष्ण कुमार आर. ने बच्चों में यदि हृदय की संरचना में कोई गड़बड़ी होती है तो उसे ठीक करने की पद्धतियों और उसमें आए नए-नए उपकरणों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। कोलकाता के डॉ. देवब्रत भट्टाचार्य ने बताया कि यदि कोरोनरी आर्टरी में कैल्शियम जम जाता है या रुकावट बहुत कठिन होती है, तो आईवॉस (IVUS) तकनीक अर्थात अल्ट्रासाउंड से लाइव देखते हुए उसका सटीक इलाज कैसे किया जाता है। इसके पश्चात रांची के डॉ. विनीत कुमार, हैदराबाद के डॉ. शरद रेड्डी, रायपुर के डॉ. गौरव त्रिपाठी और पटना के डॉ. अद्वैत आकाश ने इस कठिन कोरोनरी आर्टरी डिजीज के प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की, जिसके अंतर्गत पैनल डिस्कशन में विशेषज्ञों ने कैल्शियम को हटाकर स्टेंट लगाने की प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया।



इसी क्रम में कोच्चि के डॉ. जाबिर अब्दुल कुट्टी ने एक विशेष पैनल डिस्कशन का संचालन करते हुए बताया कि हृदय की मुख्य धमनी यानी 'लेफ्ट मेन' (Left Main) रोग में, यदि वह कई अन्य शाखाओं के साथ ब्लॉक हो जाती है, तो उसे कितनी सावधानी से करना चाहिए और प्रक्रिया के दौरान कोई डिसेक्शन या कॉम्प्लिकेशन हो जाए तो उसे कैसे टैकल करना चाहिए। चंडीगढ़ के डॉ. राजेश विजयवर्गीय ने अत्याधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि टेवार (TEVAR) या टावी (TAVI) जैसी तकनीकों से अब ओपन हार्ट सर्जरी कर हार्ट वाल्व बदलने की जरूरत नहीं है और कैथेटर के माध्यम से ही कैथ लैब में वाल्व को बदला जा सकता है। इससे बड़ी उम्र के बुजुर्ग लोगों या जो डायबिटीज और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज हैं, उनके केस में भी बिना चीड़-फाड़ किए हार्ट वाल्व का प्रत्यारोपण सुगमता से संभव हो गया है।



सम्मेलन के दौरान बिना तार के पेसमेकर लगाना, जिसे हम सबक्यूटेनियस पेसमेकर या पेसमेकर लगाने की नई विधा कहते हैं, उस पर भी विशेषज्ञों द्वारा अनुभव साझा किए गए। देहरादून से आईं डॉ. रिचा शर्मा, नेपाल से डॉ. चंद्रमणि अधिकारी और दिल्ली के डॉ. विजय त्रेहान ने कैथ लैब में उत्पन्न होने वाली गंभीर आकस्मिक समस्याओं (जैसे हार्ट का वाल्व रप्चर हो जाना) के कुशल प्रबंधन पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे हाल ही में भारत के एक मशहूर ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ी की इसी प्रकार वेंट्रिकुलर सेप्टल रप्चर होने से अत्यंत गंभीर स्थिति हो गई थी, तो वैसे चुनौतीपूर्ण मामलों में आने वाली परेशानियों को कैसे टैकल किया जाए, इस पर विशेषज्ञों ने गहन विमर्श किया। 



इसके बाद दिल्ली से आए डॉ. विजय त्रेहान ने भारत में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के इतिहास, इसके क्रमिक विकास और देश की अद्भुत उपलब्धियों पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस अवसर पर राज्य के कई वरिष्ठ चिकित्सक जैसे डॉ. यू.सी. सामल, डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अजीत प्रधान, डॉ. प्रवीर सिन्हा, डॉ. वी.पी. सिन्हा, डॉ. निशान्त त्रिपाठी, डॉ. यू.एन. सिंह एवं डॉ. अभिनव भगत इत्यादि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। यह भव्य वैज्ञानिक सम्मेलन कल रविवार, 14 जून को भी दिन भर जारी रहेगा, जिसमें हृदय रोग के उपचार से जुड़े अनेक गंभीर विषयों पर आगे भी विस्तृत चर्चा की जाएगी।