Bihar News : बिहार के कैमूर में चलती ट्रेन से करोड़ों रुपये का सोना लूटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वारदात को अंजाम देने का तरीका ऐसा था कि किसी को भनक तक नहीं लगी। बदमाशों ने खुद को DRI का अधिकारी बताया, फिर सोना लेकर जा रहे कर्मचारी को जांच के नाम पर अपने जाल में फंसाया और देखते ही देखते 2.6 किलो सोना लेकर गायब हो गए। लूटे गए सोने की कीमत करीब 2 करोड़ 92 लाख रुपये आंकी गई है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी साजिश में कारोबारी के अपने ही कर्मचारी की भूमिका सामने आई है।


मामला 22 अक्टूबर का है। बरेली के एक सोना कारोबारी की कंपनी में काम करने वाला कर्मचारी संजीव चौहान कोलकाता से चंबल एक्सप्रेस में सवार होकर बरेली जा रहा था। उसके पास कंपनी का करीब 2 किलो 600 ग्राम सोना मौजूद था। सफर के दौरान जब ट्रेन बिहार के कैमूर जिले में भभुआ रोड स्टेशन के आसपास पहुंची, तभी कुछ लोग उसके पास आए। उन्होंने खुद को राजस्व खुफिया निदेशालय यानी DRI का अधिकारी बताया और सोने की जांच करने की बात कही।


कथित अधिकारियों ने संजीव पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसे कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, उसके मालिक के घर छापेमारी करने की बात भी कही गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से कर्मचारी घबरा गया। इसी का फायदा उठाकर आरोपी उससे सोना और मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए। बाद में पता चला कि जिन लोगों को वह सरकारी अधिकारी समझ रहा था, वे दरअसल लुटेरे थे।


करोड़ों रुपये के सोने की लूट की खबर मिलते ही रेल पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कारोबारी संजय कुमार खंडेलवाल की ओर से 24 अक्टूबर को भभुआ रोड रेल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल एसपी अनंत कुमार राय ने रेल डीएसपी गुलशन कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनाई। पुलिस ने बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक जांच का दायरा बढ़ाया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान शुरू की।


जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस वारदात में कारोबारी के यहां काम करने वाले एक कर्मचारी की भी भूमिका है। उसका नाम सचिन गंगवार बताया गया है। पुलिस के अनुसार, सचिन को कंपनी के कामकाज और सोने की आवाजाही की जानकारी थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर उसने कथित तौर पर अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। बताया जा रहा है कि सचिन को कंपनी से हर महीने 15 हजार रुपये वेतन मिलता था। पुलिस ने उसे इस साजिश में लाइनर की भूमिका निभाने का आरोपी बताया है।


इसके बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बरेली में छापेमारी कर रोहित कुमार, सचिन गंगवार और वरुण कुमार को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपी बरेली के नवादा शखान गांव के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस ने वरुण कुमार के घर से 612.74 ग्राम सोना भी बरामद किया है। हालांकि, लूटे गए कुल सोने के मुकाबले बरामदगी काफी कम है।


इस मामले में धर्मेंद्र पटेल और राहुल मौर्य नाम के दो आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। रविवार को गया जंक्शन स्थित रेल थाना भवन में रेल डीएसपी गुलशन कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है।


अब पुलिस के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, फरार आरोपियों को गिरफ्तार करना और दूसरी, लूटे गए बाकी सोने को बरामद करना। फिलहाल इस वारदात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर बदमाश ट्रेन में इतनी बड़ी वारदात को कै

से अंजाम दे गए।