बक्सर शहर के गंदे पानी को सीधे गंगा नदी में गिरने से रोकने की कवायद अब तेज हो गई है. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. करीब 256 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत शहर में दो एसटीपी और तीन पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. परियोजना पूरी होने के बाद शहर के 19 प्रमुख नालों से निकलने वाले सीवेज को सीवरेज नेटवर्क के जरिए एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका उपचार किया जाएगा.
बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के माध्यम से प्रस्तावित इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया अंतिम दौर में है. निविदा पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है. दोनों एसटीपी की कुल क्षमता 51 एमएलडी होगी.
19 नालों की होगी टैपिंग
परियोजना के तहत शहर के 19 प्रमुख नालों से निकलने वाले गंदे पानी को इंटरसेप्शन ड्रेन टैपिंग के जरिए सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. करीब 8.68 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा. इसके अलावा सीवेज के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए मैनुअल और मैकेनिकल तरीके से संचालित स्क्रीन गेट लगाए जाएंगे.
उपचारित पानी के सुरक्षित निस्तारण के लिए करीब 2.7 किलोमीटर लंबी राइजिंग मेन पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी. मुख्य एसटीपी का निर्माण सारिमपुर में गंगा पुल के पास प्रस्तावित है.
तीन जगह बनेंगे पंपिंग स्टेशन
शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए तीन मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इनकी क्षमता क्रमश: 2.17 एमएलडी, 8.60 एमएलडी और 11.62 एमएलडी होगी.
प्रस्तावित योजना के अनुसार पहला पंपिंग स्टेशन श्मशान घाट के समीप, दूसरा नाथ बाबा मंदिर के सामने नहर किनारे किला मैदान के आसपास और तीसरा अहिरौली स्थित अहिल्या मंदिर के पास बनाया जाएगा.
बुडको के कनीय अभियंता रितु राज के अनुसार, पंपिंग स्टेशन सीवेज के प्रवाह को नियंत्रित करते हुए उसे एसटीपी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इससे शहर की सीवरेज और जल निकासी व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
दो अलग तकनीक से तैयार होंगे एसटीपी
परियोजना के तहत दोनों एसटीपी अलग-अलग तकनीक पर आधारित होंगे. मुख्य एसटीपी की क्षमता 50 एमएलडी होगी और इसमें एसबीआर यानी सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.
वहीं, दूसरी एसटीपी इकाई की क्षमता एक एमएलडी होगी. इसमें नेचर बेस्ड साल्यूशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. दोनों इकाइयों के जरिए शहर से निकलने वाले सीवेज का उपचार किया जाएगा.
24 महीने में पूरा करना होगा काम
परियोजना को पूरा करने की कुल अवधि 24 महीने निर्धारित की गई है. इसमें डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग का काम शामिल है. शुरुआती तीन महीने ट्रायल और कमीशनिंग के लिए रखे गए हैं.
परियोजना का निर्माण करने वाली एजेंसी को काम पूरा होने के बाद 15 वर्षों तक एसटीपी के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी.
2011 से अधर में है सीवरेज परियोजना
बक्सर की सीवरेज परियोजना लंबे समय से अधर में है. वर्ष 2011 में इस परियोजना की शुरुआत की गई थी और इसे 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. उस समय चीनी कंपनी ट्राईटेक ने करीब 52 करोड़ रुपये की निविदा पर काम शुरू किया था.
हालांकि, निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ने का हवाला देते हुए कंपनी ने करीब 10 प्रतिशत काम करने के बाद परियोजना से हाथ खींच लिया. इसके बाद वर्ष 2014 में परियोजना का प्राक्कलन बढ़ाकर करीब 70 करोड़ रुपये किया गया और 18 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की गई.
इसके बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो सकी. बाद के वर्षों में कई बार प्राक्कलन में संशोधन किया गया, लेकिन सीवरेज व्यवस्था को लेकर योजना धरातल पर नहीं उतर सकी.
नए स्थल को लेकर तकनीकी चुनौती
परियोजना के दोबारा शुरू होने से शहर के सीवरेज सिस्टम को लेकर उम्मीद बढ़ी है, लेकिन नए स्थल के चयन के बाद कुछ तकनीकी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. एसटीपी के लिए गोलंबर-छोटकी सारिमपुर रोड के पूर्व और गंगा पुल के बीच की जमीन चिह्नित की गई है.
पूर्व में चिह्नित स्थल पर किए गए आधे-अधूरे निर्माण का नए स्थल पर परियोजना शुरू होने के बाद उपयोग नहीं हो सकेगा. वहीं, प्रस्तावित नए स्थल के आसपास से गंगा नदी पर बनने वाला तीसरा पुल भी गुजर रहा है.
पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. ऐसे में एसटीपी निर्माण और पुल परियोजना के बीच तकनीकी या भूमि संबंधी किसी तरह की समस्या न हो, इसके लिए दोनों परियोजनाओं के बीच समन्वय जरूरी होगा.