BSEB fake degree case: पटना में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी BSEB के तीन कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोप है कि तीनों कर्मचारियों ने ऐसे प्रमाणपत्रों के आधार पर बिहार बोर्ड में नौकरी हासिल की, जिनके संबंधित शिक्षण संस्थानों से जारी होने की पुष्टि नहीं हो सकी. मामला सामने आने के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
जिन कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उनमें शिव कुमार यादव, माधव यादव और हरिमोहन यादव शामिल हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीनों बिहार बोर्ड में पदचर के पद पर कार्यरत थे. शिव कुमार यादव की नियुक्ति 1 जुलाई 1995 को हुई थी, जबकि माधव यादव की नियुक्ति 1 जुलाई 1994 और हरिमोहन यादव की नियुक्ति 1 अप्रैल 1995 को हुई थी. इस तरह तीनों की सेवा अवधि करीब 30 साल से अधिक की रही है.
तीनों कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच सेवा समायोजन की प्रक्रिया के दौरान कराई गई थी. जानकारी के अनुसार तीनों ने वर्ष 2005 में बिहार बोर्ड के समक्ष अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा किए थे. इसके बाद वर्ष 2016 में सेवा समायोजन की प्रक्रिया के तहत इन प्रमाणपत्रों को संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से सत्यापित कराया गया.
सत्यापन के दौरान संबंधित संस्थानों से इन प्रमाणपत्रों की वैधता के संबंध में जानकारी मांगी गई. आरोप है कि जांच में प्रमाणपत्रों के संबंधित संस्थानों से जारी होने की पुष्टि नहीं हुई. इसके बाद बोर्ड स्तर पर मामले को लेकर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई.
मामले में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी की ओर से पटना के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी गई. इसी शिकायत के आधार पर तीनों कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कर्मचारियों ने नौकरी के समय कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए थे. साथ ही प्रमाणपत्र कहां से प्राप्त किए गए, उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और इन दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति कैसे हुई, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है.
इस मामले में तीनों कर्मचारियों की नियुक्तियां वर्ष 1994 और 1995 की हैं. यानी जिन नियुक्तियों पर अब सवाल उठे हैं, वे करीब तीन दशक पुरानी हैं. वहीं, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन वर्ष 2016 में सेवा समायोजन की प्रक्रिया के दौरान कराया गया था.
अब पुलिस कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, सत्यापन रिपोर्ट और सेवा से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है. जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि प्रमाणपत्रों के संबंध में सामने आई आपत्तियों के बाद बोर्ड स्तर पर उस समय क्या कार्रवाई की गई थी.
कोतवाली थाना पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पूरे मामले की जांच में जुटी है. पुलिस प्रमाणपत्रों की वास्तविकता, उनके इस्तेमाल और नियुक्ति के समय दिए गए दस्तावेजों की पड़ताल करेगी. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.