Birth and Death Registration Rules: अगर आपके घर में बच्चे का जन्म हुआ है और अभी तक उसका जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाया गया है, या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसका डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पाया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी अब पहले की तुलना में ज्यादा औपचारिक प्रक्रिया में बदलने जा रही है। केंद्र सरकार ने Registration of Births and Deaths Act, 1969 में संशोधन किया है, जिसके तहत देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए अलग-अलग स्तर पर सत्यापन और सक्षम अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
नया कानून 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के मामलों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना और लंबे समय बाद कराए जाने वाले पंजीकरण में संभावित गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की आशंका को कम करना है।
संसद से पारित हुआ नया कानून
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण से जुड़े बदलावों के लिए Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 संसद के मानसून सत्र में पेश किया गया था। लोकसभा ने इसे 31 जुलाई को और राज्यसभा ने 4 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से यह कानून बन गया। सबसे बड़ा बदलाव उन मामलों में किया गया है, जिनमें जन्म या मृत्यु की जानकारी तय समय के काफी बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है।
1 साल से ज्यादा लेकिन 2 साल तक की देरी हुई तो क्या होगा?
अगर किसी जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो अब इसके लिए सीधे सामान्य प्रक्रिया से पंजीकरण नहीं होगा।ऐसे मामले में जिला मजिस्ट्रेट (DM), अनुमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या DM द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) का आदेश जरूरी होगा।संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता की जांच करने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दे सकेंगे। इसके साथ निर्धारित शुल्क का भुगतान भी करना होगा।यानी अगर बच्चे के जन्म के बाद एक साल से अधिक समय निकल चुका है और अब प्रमाण पत्र बनवाना है, तो आवेदक को अतिरिक्त सत्यापन और सक्षम अधिकारी की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
2 साल से ज्यादा पुराना मामला है तो कोर्ट की प्रक्रिया
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए किया गया है।अगर किसी जन्म या मृत्यु की जानकारी घटना के दो साल से ज्यादा समय बाद दी जाती है, तो ऐसे मामले में पंजीकरण के लिए Judicial Magistrate First Class (प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट) का आदेश जरूरी होगा।यहां भी संबंधित मजिस्ट्रेट जन्म या मृत्यु की वास्तविकता की जांच के बाद ही पंजीकरण का आदेश दे सकेंगे। निर्धारित शुल्क का भुगतान भी करना होगा। इसका मतलब साफ है कि जितनी ज्यादा देरी होगी, पंजीकरण की प्रक्रिया उतनी ही औपचारिक और जांच आधारित होती जाएगी।
पहले क्या था और अब क्या बदला?
संशोधन से पहले एक साल से ज्यादा देरी वाले जन्म या मृत्यु के पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। नए कानून ने एक से दो साल तक की देरी के मामलों को DM, SDM या अधिकृत Executive Magistrate के स्तर पर रखा है, जबकि दो साल से अधिक की देरी वाले मामलों में Judicial Magistrate First Class की मंजूरी जरूरी होगी।यानी सरकार ने देरी के हिसाब से पंजीकरण की प्रक्रिया को अलग-अलग स्तरों में बांट दिया है।
सरकार क्यों कर रही है यह बदलाव?
सरकार के मुताबिक जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण जरूरी है। लंबे समय बाद कराए जाने वाले पंजीकरण में गलत जानकारी या रिकॉर्ड के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए सत्यापन की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सिर्फ एक सामान्य सरकारी दस्तावेज नहीं हैं। जन्म प्रमाण पत्र व्यक्ति की पहचान और उम्र से जुड़े कई सरकारी कामों में महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति, उत्तराधिकार, पेंशन, बीमा और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है।इसी वजह से नए कानून का जोर समय पर पंजीकरण और रिकॉर्ड की प्रमाणिकता पर है।
अभी क्या करें?
अगर आपके परिवार में किसी बच्चे का जन्म हुआ है और उसका जन्म प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बना है, तो इसे टालने के बजाय जल्द पंजीकरण कराना बेहतर होगा। इसी तरह परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हुई है और उसका डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पाया है, तो संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रक्रिया पूरी करानी चाहिए। 1 अक्टूबर 2026 से नए प्रावधान लागू होने के बाद देरी के मामलों में अतिरिक्त सत्यापन और सक्षम अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। इसलिए समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराना आगे की कागजी कार्रवाई को आसान रख सकता है।