Bihar News : बिहार में युवाओं के कौशल, रोजगार और उच्च शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं को लेकर एक साथ कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) के संचालन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और KYP संचालक अपनी मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन कर चुके हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के लाभार्थियों की ओर से करीब आठ महीनों से भुगतान नहीं मिलने की शिकायत सामने आ रही है। इन सबके बीच बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत मिलने वाली शिक्षा ऋण की अधिकतम राशि 4 लाख रुपये से घटाकर 2 लाख रुपये किए जाने को लेकर भी युवाओं के बीच सवाल उठ रहे हैं।
यानी रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण, नौकरी की तलाश के दौरान आर्थिक सहायता और उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाले ऋण—युवाओं से जुड़ी तीन अलग-अलग व्यवस्थाओं में बदलाव और परेशानियों ने सरकार की युवा योजनाओं पर चर्चा तेज कर दी है।
KYP केंद्रों के संचालन पर संकट
कुशल युवा कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसके तहत युवाओं को कंप्यूटर, संचार कौशल और रोजगार से जुड़े अन्य जरूरी प्रशिक्षण दिए जाते हैं। बड़ी संख्या में युवा इन केंद्रों के माध्यम से नौकरी के लिए अपनी तैयारी बेहतर करते हैं।
लेकिन अब KYP केंद्रों के संचालन को लेकर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। KYP संचालकों ने अपनी मांगों को लेकर गुरुवार को पटना में प्रदर्शन किया। संचालकों की समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में प्रशिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
यदि केंद्रों का संचालन बाधित होता है तो इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ेगा, जो रोजगार की तैयारी के लिए इन केंद्रों पर निर्भर हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कौशल प्रशिक्षण का महत्व काफी ज्यादा है।
बेरोजगारी भत्ता भी सवालों के घेरे में
दूसरी ओर मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को अधिकतम 24 महीने तक हर महीने 1,000 रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आर्थिक सहारा देना है।
लेकिन लाभार्थियों की ओर से भुगतान में देरी की शिकायत सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि करीब आठ महीनों से बेरोजगारी भत्ते का भुगतान नहीं किया गया है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
1,000 रुपये की मासिक राशि भले ही बहुत बड़ी रकम नहीं हो, लेकिन बेरोजगार युवाओं के लिए यह नौकरी के आवेदन, यात्रा, इंटरनेट और दूसरी जरूरतों में मददगार हो सकती है। ऐसे में लगातार भुगतान नहीं होने से लाभार्थियों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में 4 लाख से 2 लाख रुपये
इन दोनों मुद्दों के बीच स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में राशि घटाए जाने का मामला भी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। बिहार में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लंबे समय से महत्वपूर्ण सहारा रही है।
पहले इस योजना के तहत विद्यार्थियों को अधिकतम 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिल सकता था। अब अधिकतम ऋण राशि को 2 लाख रुपये किए जाने की बात सामने आई है। यानी उच्च शिक्षा के लिए उपलब्ध अधिकतम ऋण राशि में सीधे 50 प्रतिशत की कमी हुई है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब उच्च शिक्षा की फीस, हॉस्टल, किताबें, लैपटॉप और दूसरे शैक्षणिक खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, तब 2 लाख रुपये की सीमा में कितने विद्यार्थियों की जरूरत पूरी हो पाएगी? खासकर ऐसे विद्यार्थी जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा कम होना उच्च शिक्षा की योजना को प्रभावित कर सकता है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, प्रोफेशनल और दूसरे महंगे पाठ्यक्रमों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है।
तीन योजनाएं, एक बड़ा सवाल—युवाओं को राहत कब?
अगर तीनों मुद्दों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर काफी महत्वपूर्ण बनती है। KYP युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करता है, स्वयं सहायता भत्ता नौकरी मिलने तक आर्थिक सहारा देने के लिए है और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड उच्च शिक्षा के रास्ते को आसान बनाने के लिए बनाया गया है।
लेकिन KYP संचालन पर संकट, बेरोजगारी भत्ते के भुगतान में कथित देरी और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि 4 लाख से घटाकर 2 लाख किए जाने से युवाओं के सामने कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार के सामने अब चुनौती सिर्फ योजनाओं की घोषणा करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि उनका लाभ समय पर और पर्याप्त रूप से युवाओं तक पहुंचे। KYP संचालकों की मांगों का समाधान, बेरोजगारी भत्ते के लंबित भुगतान पर स्थिति स्पष्ट करना और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की कम हुई राशि को लेकर सरकार की नीति—इन तीनों मुद्दों पर युवाओं को स्पष्ट जवाब का इंतजार है।
युवाओं के लिए राहत या बढ़ती मुश्किल?
बिहार में बड़ी आबादी युवा है और रोजगार तथा उच्च शिक्षा उनकी सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल हैं। ऐसे में युवा केंद्रित योजनाओं में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे लाखों परिवारों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार KYP के संचालन को लेकर उठे संकट को कैसे दूर करती है, बेरोजगारी भत्ते के भुगतान में देरी की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा 4 लाख से घटाकर 2 लाख रुपये करने के पीछे सरकार का तर्क क्या है।युवाओं के सामने फिलहाल सवाल यही है—कौशल प्रशिक्षण मिले, बेरोजगारी के दौरान आर्थिक सहारा मिले और उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त वित्तीय मदद भी मिले, तो इन तीनों मोर्चों पर व्यवस्था कितनी मजबूत रहेगी?