Bihar News : बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। इस अभियान के तहत उन पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिनका नाम किसी कारण से वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हो पाया है। इसके साथ ही 18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवाओं को भी मतदाता बनने का मौका मिलेगा। निर्वाचन विभाग के अनुसार, इस विशेष अभियान को एक महीने के भीतर पूरा करने की योजना है।


बिहार में मतदाता सूची को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आयोग का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल लगातार SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने की पहल से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक मतदाता सूची में जगह नहीं बना पाए हैं।


फॉर्म-6 के जरिए जुड़ेगा नाम

निर्वाचन विभाग के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा। बूथ स्तर पर ऐसे पात्र लोगों की पहचान की जाएगी, जिनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका आवेदन लिया जाएगा और नाम जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।


इस काम में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की अहम भूमिका होगी। बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और यह पता लगाएंगे कि कहीं कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से छूटा तो नहीं है। जिन लोगों का नाम सूची में नहीं मिलेगा, उन्हें पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने में मदद दी जाएगी।


जरूरत पड़ने पर मतदान केंद्रों पर लगेंगे कैंप

विशेष अभियान के दौरान जरूरत के हिसाब से मतदान केंद्रों पर शिविर भी लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है, जो किसी कारण से आवेदन नहीं कर पाते या जिन्हें मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।


मजदूरों की कॉलोनियों, रात्रि आश्रय स्थलों और बेघर लोगों के लिए भी विशेष कैंप आयोजित करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा कमजोर वर्ग के पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। जिला और प्रदेश स्तर के निर्वाचन अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, ताकि अभियान के दौरान पात्र लोगों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके।


राजनीतिक दलों को भी मिलेगी सूची

अभियान पूरा होने के बाद निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी मतदान केंद्र के हिसाब से सूची तैयार करेंगे। इसके बाद यह सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएगी। इससे राजनीतिक दलों को भी अपने स्तर पर मतदाता सूची की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।


निर्वाचन विभाग की इस व्यवस्था का उद्देश्य मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए निर्धारित पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।


SIR को लेकर क्यों गरमाई हुई है राजनीति?

बिहार में SIR को लेकर सियासी माहौल पहले से गर्म है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। इसी मुद्दे को लेकर पटना में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकभवन मार्च किया। इस दौरान महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की।


SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान कर नाम हटाने की कार्रवाई की गई थी। इसके साथ ही नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी चली थी। अब छूटे हुए मतदाताओं और युवाओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के फैसले ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।


पात्र मतदाता क्या करें?

अगर आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है और आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो फॉर्म-6 के जरिए पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है। जिन लोगों को अपने नाम की स्थिति की जानकारी नहीं है, वे मतदाता सूची की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं।


ध्यान रहे कि आवेदन करने मात्र से नाम जुड़ना सुनिश्चित नहीं होता। आवेदन का सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मतदाता सूची में नाम शामिल किया जाएगा। बिहार में शुरू होने वाला यह विशेष अभियान उन पात्र नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जो अब तक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं करा पाए हैं।