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16-Mar-2026 07:42 AM
By First Bihar
BIHAR NEWS : बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ किया कि अगर वे 24 घंटे के भीतर काम पर लौटते हैं, तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिकारी और कर्मचारी इस समय सीमा में काम पर लौटेंगे, उनकी हड़ताल अवधि का समायोजन किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि दबाव की राजनीति नहीं चलेगी, बल्कि परिणाम देकर ही हक हासिल किया जा सकता है।
विजय सिन्हा ने कहा कि मार्च का महीना राजस्व के कामकाज के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस समय कई जनहित के अभियान भी चल रहे हैं, जिन्हें सुचारू रूप से पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिणाम दिखाकर ही अधिकारी अपने हक की मांग कर सकते हैं। इस समय मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा और राजस्व महाअभियान भी चल रहे हैं, जिसमें करीब 46 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका शीघ्र निष्पादन जरूरी है। ऐसे संवेदनशील समय में हड़ताल पर जाना सही कदम नहीं है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ई-मापी अभियान मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रहा है, जिसमें 31 मार्च तक कई टारगेट पूरे करने हैं। सरकार जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देती है और इसलिए संवाद और समन्वय का रास्ता अपनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि सुधार उपसमाहर्ता से जुड़े मामलों से जनहित प्रभावित नहीं होना चाहिए। अधिकारी अगर काम पर लौटते हैं तो सरकार उदारता के साथ उनके मामलों पर विचार करेगी।
विजय सिन्हा ने यह भी चेतावनी दी कि दबाव की राजनीति से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। उन्होंने कहा कि सरकार जायज समस्याओं के समाधान के प्रति संवेदनशील है, लेकिन प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को यह समझना होगा कि उनका व्यवहार बिहार की जनता के हित पर प्रभाव डाल सकता है।
दरअसल, बिहार के अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी 9 मार्च से हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन रूप से चल रही है। हड़ताली अधिकारियों की मांग है कि जिन अंचलाधिकारियों को डीसीएलआर पद पर प्रोन्नत किया गया है, उन्हें जल्द से जल्द पदस्थापित किया जाए। उनका कहना है कि दस साल तक अंचलाधिकारी रहे अधिकारी इस पद का दायित्व अच्छे से निभा सकते हैं।
अंचलाधिकारी और राजस्व पदाधिकारी यह भी मानते हैं कि इस मामले की नियमावली 2010 में जारी हो चुकी थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। उच्च न्यायालय के फैसले का भी अनुपालन नहीं हुआ है और इस संबंध में अवमानना वाद भी चल रहा है। हड़ताली अधिकारियों का कहना है कि वे नया नहीं मांग रहे, बल्कि पुराने आदेशों को लागू कराने की मांग कर रहे हैं। फरवरी में हड़ताल के बाद उन्हें 12 फरवरी तक आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह पूरा नहीं किया गया।
वर्तमान स्थिति में, उपमुख्यमंत्री ने अंचलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को तुरंत काम पर लौटने का आह्वान किया है। सरकार ने साफ किया है कि जो अधिकारी समय पर काम पर लौटेंगे, उनकी हड़ताल की अवधि का समायोजन किया जाएगा और उन्हें किसी तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, जो हड़ताल जारी रखेंगे, उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।
इस तरह बिहार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित को प्रभावित करने वाले कदम स्वीकार्य नहीं हैं। अधिकारी अगर काम पर लौटते हैं, तो यह सरकार और कर्मचारियों के बीच विश्वास और समन्वय को मजबूत करेगा, जबकि हड़ताल जारी रखने पर स्थिति और जटिल हो सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार की सियासी और प्रशासनिक फिज़ा इस समय बेहद संवेदनशील है। मार्च में चल रहे राजस्व अभियान, समृद्धि यात्रा और ई-मापी अभियान की सफलता सीधे अधिकारियों की सक्रियता पर निर्भर करती है। ऐसे में सरकार का अल्टीमेटम स्पष्ट संदेश है – काम करें, दबाव नहीं डालें, और जनहित सुनिश्चित करें।