PATNA: राज्य में निगरानी ब्यूरो के स्तर से आरोपियों को सजा दिलाने की मुहिम में काफी तेजी आई है। वर्ष 2000 से 2024 के दौरान यानी पिछले 25 वर्षों के दौरान सालाना औसतन 5.6 आरोपियों को सजा दिलाई गई, लेकिन सिर्फ पिछले वर्ष यानी 2025 में 30 आरोपियों को सजा दिलाई गई। इस वर्ष अब तक 10 आरोपियों को सजा दिलाई जा चुकी है। इस तरह सजा दिलाने की यह दर इस वर्ष पिछले आंकड़ों से कहीं आगे पहुंच जाएगी। ये बातें निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक (डीजी) जितेंद्र सिंह गंगवार ने कही। वे सोमवार को निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि मामलों को चिन्हित करते हुए इनका वर्गीकरण कर प्राथमिकता के आधार पर स्पीडी ट्रायल कराने की जरूरत है। ऐसी पहल से टिकाऊ बदलाव करने की जरूरत है। इससे शुरुआत में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की संख्या बढ़ेगी, लेकिन बाद में इनकी संख्या कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल में निगरानी ब्यूरो के स्तर से भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कार्रवाई हुई है, उसका सकारात्मक प्रभाव सरकारी महकमों में पड़ा है। 


डीजी गंगवार ने कहा कि आगामी योजना के तहत प्रत्येक जिला में एक थाना या ओपी खोलने की है। इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करके जल्द ही विभाग को भेज दिया जाएगा। प्रत्येक प्रमंडल स्तर पर एक-एक क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। मौजूदा समय में पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में निगरानी का एक-एक कोर्ट मौजूद है। इसकी संख्या में भी बढ़ोतरी करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई कार्रवाई में टॉप-6 विभागों की बात करें, तो सबसे ज्यादा कार्रवाई राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 44 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसके अलावा पुलिस विभाग में 32, स्वास्थ्य विभाग में 10, शिक्षा विभाग में भी 10, ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग में 6-6 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 


गंगवार ने कहा कि निगरानी ब्यूरो में भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 25 वर्षों यानी वर्ष 2000 से 2024 तक सालाना औसतन 72 एफआईआर होती थी। पिछले वर्ष इसमें 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और एफआईआर की यह संख्या बढ़कर 122 हो गई। मौजूदा वर्ष में पिछले वर्ष की तुलना में इसमें दो गुणा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 25 वर्षों में औसतन दो दिन में एक एफआईआर दर्ज होती थी, लेकिन वर्तमान में यह औसत घटकर 1.4 दिन हो गई है। इसका मतलब अब औसतन डेढ़ दिन में एक मामला दर्ज हो रहा है। इसी तरह ट्रैप के मामले में पिछले 25 वर्षों में सालाना औसतन 49 होते थे, जो 2025 में बढ़कर 101 हो गई और इस वर्ष इसमें तीन गुणा की बढ़ोतरी होने की संभावना है। महानिदेशक ने कहा कि अवैध तरीके से संपत्ति जमा करने वाले लोक सेवकों के खिलाफ भी तेजी से कार्रवाई की जा रही है। अब तक भ्रष्टाचारियों की 102 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें 32 करोड़ रुपये की संपत्ति अंतिम रूप से जब्त कर ली गई है।


महानिदेशक ने कहा कि शिक्षकों की वर्ष 2006 से 2015 के बीच हुई बहाली में गड़बड़ी की जा रही है। इसमें अब तक 3.50 लाख शिक्षकों के 6.70 लाख प्रमाण-पत्रों की जांच हो गई है, जिसमें 1830 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। कुछ मामलों की जांच चल रही है। इस जांच में नेपाल के अलावा दूसरे राज्यों के भी 378 बोर्ड या विश्वविद्यालय से विभिन्न तरह के डिग्रियों की जांच कराई गई है। इस मौके पर विकास आयुक्त ने जागरुकता सप्ताह के तहत आयोजित ‘भ्रष्टाचार विरोध रोकथाम’ विषय पर आयोजित व्याख्यान प्रतियोगिता में पहले तीन स्थान पाने वाले विभागीय कर्मियों को सम्मानित किया। वहीं, महानिदेशक श्री गंगवार ने पेंटिंग और स्लोगन प्रतियोगिता में सफल बच्चों को सम्मानित किया। इस प्रतियोगिता में पटना बेली रोड स्थित केंद्रीय विद्यालय के बच्चे शामिल हुए। इस मौके पर निगरानी ब्यूरो की आईजी श्रीमती गरिमा मलिक, डीआईजी राकेश रंजन, डीआईजी मृत्युंजय कुमार, एसपी मनोज कुमार, एसपी सुबोध कुमार विस्वास, थानाध्यक्ष विनोद कुमार पांडेय समेत अन्य मौजूद थे।