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05-Feb-2026 02:19 PM
By First Bihar
Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में एक ताजगीपूर्ण और विवादित वाकया देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सदन में सरकार पर निशाना साधते हुए महिलाओं के सम्मान और उनके आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जेडीयू और भाजपा के नेता चुनावी समय में महिलाओं की सम्मान की बातें करते हैं और बिहार चुनाव में महिलाओं को 10,000 रुपये देने का दावा करते हैं।
तेजस्वी यादव ने इस बीच उत्तराखंड के नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “आपके उत्तराखंड के नेता क्या कहते हैं, यह भी बीजेपी वालों को बताना चाहिए। उत्तराखंड के नेता कहते हैं कि 20-25 हजार रुपये में महिलाएं खरीदी जाती हैं। महिलाएं बिकती हैं।” इस टिप्पणी के बाद सदन में एक क्षण के लिए शांति भंग हो गई और कई विधायक सकते में आ गए।
तेजस्वी यादव की यह टिप्पणी महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की गरिमा को लेकर विवादास्पद मानी गई। सत्ता पक्ष की महिला विधायक, जो तुरंत प्रतिक्रिया देना चाहती थीं, इनलोगों ने तेजस्वी यादव की टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताते हुए सदन में हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने तेजस्वी से माफी मांगने की मांग की और कहा कि इस तरह के बयान न केवल महिलाओं की भावनाओं को आहत करते हैं, बल्कि पूरी महिला समाज को अपमानित करने वाला है।
सदन की कार्यवाही उस समय गहमागहमी में बदलगई जब महिला विधायक जोर-जोर से अपना विरोध प्रकट करने लगीं। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक मंच पर महिलाओं को “खरीदी या बेची जाने वाली वस्तु” के रूप में पेश करना पूरी तरह अनुचित है। उनकी आवाज़ सदन के अन्य सदस्यों तक भी गूंजने लगी और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
इस घटना के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को संयमित बनाने के लिए हस्तक्षेप किया। उन्होंने सभी सदस्यों से शांति बनाए रखने और चर्चा को संविधानिक और संवैधानिक रूप से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। हालांकि, महिला विधायक अपनी नाराजगी जताने से पीछे नहीं हटीं और उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे बयान महिलाओं के सम्मान के खिलाफ हैं और राजनीतिक दलों को इस पर संवेदनशील होना चाहिए।
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