पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन गांवों में लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट को लेकर सदन में जमकर बहस देखने को मिली। जदयू विधायक श्याम रजक ने पंचायती राज विभाग की ओर से लगाए गए सोलर लाइटों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में सोलर लाइट खराब पड़ी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 70 प्रतिशत सोलर लाइट अब काम नहीं कर रही हैं, जिससे गांवों में अंधेरा पसरा हुआ है।

श्याम रजक ने सदन में कहा कि पंचायती राज विभाग की ओर से गांव-गांव में सोलर लाइट लगाने के लिए टेंडर निकाला गया था, लेकिन कई जगहों पर संवेदक काम पूरा करने के बाद पैसा लेकर गायब हो गए। इसके कारण खराब हो चुकी लाइटों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जो सोलर लाइटें बंद पड़ी हैं, क्या सरकार उन्हें दोबारा चालू कराने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में सोलर लाइट लगवाई थी, लेकिन रखरखाव की कमी के कारण यह योजना प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि खराब पड़ी सभी सोलर लाइटों की जांच कराकर उन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाए।

मंत्री दीपक प्रकाश ने स्वीकार की समस्या, कार्रवाई का दिया भरोसा

श्याम रजक के सवाल का जवाब देते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सदस्य द्वारा उठाया गया मुद्दा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि सभी जगह 70 प्रतिशत लाइट बंद हैं, लेकिन कई जगहों पर सोलर लाइट खराब होने की शिकायतें जरूर मिली हैं।

मंत्री ने कहा कि कोई भी एजेंसी सरकार का पैसा लेकर फरार नहीं हुई है। जिन एजेंसियों को सोलर लाइट लगाने और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है, उनके काम की लगातार समीक्षा की जा रही है। जहां भी लापरवाही सामने आती है, वहां संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने सदन को बताया कि खराब सोलर लाइटों की मरम्मत का काम चल रहा है और विभाग की ओर से इसकी निगरानी भी की जा रही है। उन्होंने विधायकों से कहा कि अगर उनके क्षेत्र में कहीं सोलर लाइट खराब है तो इसकी लिखित शिकायत विभाग को दें, जिस पर कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने मंत्री को दी चुनौती

मंत्री के जवाब के बाद भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब खुद सदन में जदयू विधायक ने 70 प्रतिशत लाइट खराब होने की बात कही है और विभागीय आंकड़ों में भी बड़ी संख्या में लाइटों के खराब होने की बात सामने आ रही है, तो फिर मंत्री इसे स्वीकार करने से क्यों बच रहे हैं।

जीवेश मिश्रा ने कहा कि विभाग के अनुसार 11.50 लाख सोलर लाइटों के मुकाबले बड़ी संख्या में लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि अगर 50 प्रतिशत लाइटें भी बंद हैं तो सरकार को इसे स्वीकार करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने मंत्री दीपक प्रकाश को चुनौती देते हुए कहा कि वह उनके साथ क्षेत्र में चलकर जांच कर लें कि कितनी सोलर लाइटें वास्तव में जल रही हैं और कितनी खराब पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की टीम अगर मौके पर जाकर जांच करेगी तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।

अधिकारियों पर भी उठे सवाल

जीवेश मिश्रा ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब विधायक या स्थानीय लोग खराब सोलर लाइट की शिकायत लेकर अधिकारियों से संपर्क करते हैं तो कई बार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते हैं। ऐसे में आम लोगों की समस्या का समाधान कैसे होगा। उन्होंने कहा कि केवल फोटो मांग लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे खराब लाइटों की शिकायत दर्ज हो और तय समय सीमा के अंदर उसका समाधान किया जाए।

मंत्री ने शिकायत मिलने पर कार्रवाई का दिया आश्वासन

इसके जवाब में मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में सोलर लाइट खराब है तो उसकी जानकारी विभाग को दी जाए। उन्होंने कहा कि 19 अगस्त तक शिकायतों का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

विधानसभा में सोलर लाइट को लेकर हुई इस बहस ने ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार खराब पड़ी सोलर लाइटों को कितनी जल्दी ठीक कराती है और क्या विपक्ष के दावों की जांच के लिए कोई विशेष अभियान चलाया जाता है।