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11-Feb-2026 11:56 AM
By First Bihar
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा के सातवें दिन की कार्यवाही में आज पंचायती राज विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा हुई। इस दौरान वाम दल के विधायक संदीप सौरभ ने सवाल किया कि पुराने समय में पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायतों में दलपति बहाल किए जाते थे, जिन्हें बाद में पंचायत सचिव के पद पर बहाल किया गया। लेकिन पटना जिले के कुछ दलपतियों को अब तक यह अवसर क्यों नहीं मिला, यह स्पष्ट नहीं है।
वाम विधायक ने कहा कि पटना जिले के 18 दलपतियों को पंचायत सचिव के रिक्त पदों पर बहाल करने का मामला लंबित है। इसके लिए हाई कोर्ट से दो-दो आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। 1990 के बाद से दलपतियों को पंचायत सचिव के पद पर बहाली का काम शुरू हुआ था, लेकिन पटना जिले के 18 दलपतियों को अब तक यह अवसर नहीं मिला। जब यह लोग हाई कोर्ट गए, तो अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि पटना जिले में 111 पद खाली हैं और इन पर 90 दिनों के भीतर बहाली करवाई जाए। इस पर सवाल उठाया गया कि क्या कोर्ट के आदेश को समीक्षा करने के अधिकार किसी जिला अधिकारी के पास होता है।
इस मुद्दे पर पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि दलपति1950-1960 के दशक से ग्रामीण स्तर पर अपनी सेवा दे रहे हैं। पहले यह लोग चोरी-डकैती जैसी घटनाओं की निगरानी करते थे। 1991 में जनगणना और परिसीमन के बाद बिहार में पंचायतों की संख्या बढ़ गई और इन पदों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, 2011 के बाद पंचायत सचिव की बहाली बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की जाने लगी और इसके लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास निर्धारित कर दी गई। ऐसे में पुराने दलपतों को सीधे बहाल करना संभव नहीं है।
इसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया गया है और जिलाधिकारी ने इस पर विचार कर निर्णय लिया। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में कहा कि कोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “समीक्षा की जा सकती है,” इसलिए इसमें बट, किंतु, परंतु जैसी स्थितियां लागू नहीं होतीं।
इस पर मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार इस मामले पर संवेदनशील है, लेकिन वर्तमान में इन लोगों को पंचायत सचिव के पद पर बहाल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि योजना बनती है और पद उपलब्ध होते हैं, तो उन दलपतियों को बहाल किया जाएगा।इस प्रकार, पटना जिले के दलपतियों की पंचायत सचिव पद पर बहाली का मामला फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन सरकार ने भविष्य में उनकी बहाली की संभावना को खोला हुआ रखा है।