बिहार में सरकारी नौकरी की बहाली प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हैरानी की बात यह है कि जिस परीक्षा का रिजल्ट पहले ही जारी किया जा चुका है, उसी परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों को अब दोबारा अपनी काबिलियत साबित करनी होगी। मामला बिहार विधान परिषद में निजी सहायक और स्टेनोग्राफर के पदों पर होने वाली नियुक्ति से जुड़ा है। यहां सात पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद अचानक दोबारा दक्षता जांच कराने का निर्देश जारी कर दिया गया है। अब सवाल उठने लगा है कि आखिर जब रिजल्ट जारी हो गया था तो फिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति पैदा हो गई कि सफल उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बुलाना पड़ा?
इस फैसले ने विधान परिषद की बहाली प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है। खास बात यह है कि इस बार परीक्षा सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित की जाएगी। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है और परीक्षा केंद्र पर मजिस्ट्रेट की भी तैनाती की गई है। यानी इस बार हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
रिजल्ट आने के बाद क्यों याद आई दोबारा परीक्षा?
दरअसल, बिहार विधान परिषद में विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत निजी सहायक और स्टेनोग्राफर के कुल सात पदों पर सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इन पदों के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद परीक्षा का अंतिम परिणाम भी घोषित कर दिया गया और सात अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।
आमतौर पर किसी भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी होने के बाद चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। लेकिन इस मामले में कहानी ने अचानक नया मोड़ ले लिया। परिणाम घोषित होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों की शॉर्टहैंड दक्षता को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई। इसके बाद विधान परिषद ने सभी सात सफल उम्मीदवारों की दोबारा दक्षता जांच कराने का फैसला लिया।
यानी अब जिन अभ्यर्थियों को अपनी सफलता की खबर मिल चुकी थी, उन्हें एक बार फिर परीक्षा की कसौटी से गुजरना होगा। हालांकि, दोबारा जांच कराने के पीछे किसी खास उम्मीदवार के खिलाफ क्या शिकायत मिली थी या किन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया गया, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
आज 11:30 बजे से हो रही दोबारा परीक्षा, CCTV से निगरानी
दोबारा दक्षता जांच परीक्षा के लिए सभी सात सफल अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। यह परीक्षा सुबह 11:30 बजे बिहार विधान परिषद के विस्तारित भवन में आयोजित की जा रही है। इस बार परीक्षा की व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजिस्ट्रेट की भी ड्यूटी लगाई गई है। इस तरह परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को निगरानी के दायरे में रखने की तैयारी की गई है।
सात पदों के लिए सात सफल अभ्यर्थियों को फिर साबित करनी होगी काबिलियत
इस भर्ती प्रक्रिया में सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोबारा दक्षता जांच के लिए केवल किसी एक अभ्यर्थी को नहीं, बल्कि सभी सात सफल उम्मीदवारों को बुलाया गया है। निजी सहायक और स्टेनोग्राफर जैसे पदों पर शॉर्टहैंड की दक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को अधिकारियों के निर्देशों, बैठकों और महत्वपूर्ण चर्चाओं को तेजी से शॉर्टहैंड में लिखना और बाद में उसे सही तरीके से टाइप करना होता है।
ऐसे में उम्मीदवारों की वास्तविक दक्षता का आकलन नियुक्ति के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। अगर किसी उम्मीदवार की शॉर्टहैंड क्षमता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, तो उससे कामकाज प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से दोबारा दक्षता जांच का फैसला लिया गया है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि इस जांच के बाद ही अंतिम नियुक्ति को लेकर अगला फैसला स्पष्ट होगा।
बहाली प्रक्रिया पर उठ रहे कई सवाल
रिजल्ट जारी होने के बाद दोबारा परीक्षा कराने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और अंतिम परिणाम भी घोषित कर दिया गया था, तब दोबारा जांच की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या परिणाम जारी होने से पहले अभ्यर्थियों की दक्षता का सही तरीके से आकलन नहीं किया गया था? क्या जांच के दौरान कोई तकनीकी या प्रक्रियागत कमी सामने आई? या फिर किसी स्तर पर शिकायत मिलने के बाद पूरी प्रक्रिया को दोबारा परखने का निर्णय लिया गया?फिलहाल इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। विधान परिषद की ओर से दोबारा जांच कराने का निर्देश जरूर दिया गया है, लेकिन इसके पीछे की पूरी वजह सार्वजनिक नहीं हुई है।
अब सबकी नजर दोबारा होने वाली शॉर्टहैंड दक्षता जांच पर टिकी है। परीक्षा के बाद यह साफ होगा कि सातों अभ्यर्थी निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं और नियुक्ति प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।कुल मिलाकर, बिहार विधान परिषद की इस बहाली में रिजल्ट के बाद आया यह नया ट्विस्ट काफी अहम हो गया है। अब देखना होगा कि CCTV की निगरानी में होने वाली दोबारा परीक्षा से चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल पाता है या नहीं।