Bihar News: नियुक्तियों पर उठे सवाल के बाद बिहार विधान परिषद बैकफुट पर आ गया है। अब PA (निजी सहायक) भर्ती के बाद निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) और डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को भी दोबारा दक्षता जांच से गुजरना होगा। बिहार विधान परिषद सचिवालय ने विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत अंतिम परीक्षाफल में सफल घोषित किए गए कुल 43 अभ्यर्थियों की टाइपिंग दक्षता जांच दोबारा कराने का निर्देश जारी किया है।




विधान परिषद सचिवालय की ओर से 6 नवंबर 2026 को जारी सूचना के अनुसार, निम्नवर्गीय लिपिक के 10 और डाटा एंट्री ऑपरेटर के 33 सफल अभ्यर्थियों की हिन्दी और अंग्रेजी टाइपिंग की व्यावहारिक दक्षता जांच 18 नवंबर 2026 (बुधवार) को आयोजित की जाएगी।




विधान परिषद सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह जांच कराई जा रही है। इसके लिए विषय विशेषज्ञों का तीन सदस्यीय पैनल गठित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया हाई रेजोल्यूशन कैमरे की निगरानी और दंडाधिकारी की उपस्थिति में संपन्न होगी।




जारी सूचना के मुताबिक, अंतिम परीक्षाफल में सफल घोषित किए गए सभी 43 अभ्यर्थियों के लिए दोबारा टाइपिंग दक्षता जांच में शामिल होना अनिवार्य है। जो अभ्यर्थी इस जांच में शामिल नहीं होंगे, उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।




विधान परिषद सचिवालय ने बताया कि संबंधित अभ्यर्थियों को उनके आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी के माध्यम से इसकी जानकारी भेजी जाएगी। जांच से संबंधित विस्तृत सूचना बिहार विधान परिषद की आधिकारिक https://vidhanparishad.bihar.gov.in पर वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।




इस फैसले के बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक सवाल भी उठ रहा है। जब PA समेत अन्य पदों की भर्ती में दोबारा जांच की जा रही है और अब LDC तथा DEO के 43 अभ्यर्थियों को भी फिर से टाइपिंग दक्षता जांच में शामिल होना होगा, तो 12 आशुलिपिक अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा से छूट क्यों दी गई है? 




बता दें कि बिहार विधान परिषद सचिवालय ने 26 नवंबर 2025 को विज्ञापन सं- 2/25 जारी किया था। जिसमें कुल 64 विभिन्न पदों पर नियुक्ति किया जाना था। इनमें निजी सहायक के 7 पद, आशुलिपिक का 12, डाटा इंट्री ऑपरेटर का 35 और निम्न वर्गीय लिपिक का 10 पद शामिल था।




विधान परिषद ने पहले नव नियुक्त सात निजी सहायकों के लिए री एग्जाम लेने का आदेश दिया। विवाद बढ़ा और विधान परिषद सचिवालय कटघरे में खड़ा हुआ तब जाकर निम्न वर्गीय लिपिक और डाटा ऑपरेटर के री एग्जाम लेने का आदेश जारी हुआ है। हालांकि अभी भी आशुलिपिक पद पर बहाल किए गए अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा लेने को लेकर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। विधान परिषद सचिवालय ने ऐसा क्यों किया है यह स्पष्ट नहीं हो सका है। नए बहाल आशु लिपिकों से दोबारा परीक्षा नहीं लेने के आदेश पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, फर्स्ट बिहार