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06-Apr-2026 07:18 AM
By First Bihar
Bihar News : राज्यसभा चुनाव के बाद अब बिहार की सियासत का पूरा फोकस विधान परिषद चुनाव पर केंद्रित हो गया है। राजनीतिक गलियारों में लगातार इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि इस बार का एमएलसी चुनाव काफी दिलचस्प और रणनीतिक होने वाला है। सभी प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी चुनावी गणित को साधना शुरू कर दिया है। शुरुआती अनुमान और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर कहा जा रहा है कि इस बार महागठबंधन को दो सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि एनडीए को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार के गठन के तुरंत बाद विधानसभा कोटे से विधान परिषद की सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह या फिर मई के पहले सप्ताह तक ये चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। इसी चुनावी हलचल के बीच सबसे बड़ी चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खाली हुई सीट को लेकर है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर उनके बेटे निशांत कुमार का विधान परिषद में जाना लगभग तय माना जा रहा है। यही नहीं, यह भी चर्चा है कि नई सरकार में उन्हें कोई महत्वपूर्ण भूमिका भी सौंपी जा सकती है, जिससे उनकी राजनीतिक एंट्री और मजबूत हो जाएगी।
इसी तरह, बीजेपी कोटे से मंगल पांडेय की सीट पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक फॉर्मूले और अंदरूनी सहमति के आधार पर माना जा रहा है कि इस सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता है। खास बात यह है कि दीपक प्रकाश फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन वे सरकार में मंत्री पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में उनका एमएलसी बनना लगभग तय माना जा रहा है।
सीटों के संभावित बंटवारे की बात करें तो इस बार के राजनीतिक फॉर्मूले के अनुसार जदयू को 4 सीटें, बीजेपी को 3 सीटें, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 1 सीट और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को 1 सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए भी जून में विधान परिषद में खाता खुलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
अगर मौजूदा और आने वाले खाली पदों की स्थिति पर नजर डालें तो 28 जून 2026 को विधान परिषद की कुल 9 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें आरजेडी की 2, जदयू की 3, बीजेपी और कांग्रेस की 1-1 सीट शामिल है। इसके अलावा 2 सीटें पहले से ही खाली पड़ी हैं। इन सीटों में कुछ एमएलसी के विधानसभा चुनाव जीतने के कारण इस्तीफे से पद रिक्त हुए हैं।
इनमें आरजेडी के मोहम्मद फारूक और सुनील कुमार सिंह, जदयू के गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, बीजेपी के संजय मयूख और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह का कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके अलावा बीजेपी के सम्राट चौधरी और जदयू के भगवान सिंह कुशवाहा की सीटें पहले से खाली हैं, क्योंकि वे विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं। सम्राट चौधरी तारापुर से और भगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपुर से विधायक चुने गए थे।
इसके अतिरिक्त तीन सीटों पर उपचुनाव भी होना है। इनमें एक सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की और दूसरी सीट बीजेपी नेता मंगल पांडेय की है। ये दोनों सीटें विधानसभा कोटे की हैं। मंगल पांडेय विधायक बन चुके हैं, जबकि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बनकर एमएलसी पद से इस्तीफा दे चुके हैं। दोनों का कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन इस्तीफे के कारण सीटें रिक्त हो गई हैं।
तीसरी उपचुनाव वाली सीट जदयू के राधाचरण सेठ की है, जो स्थानीय प्राधिकार कोटे से भोजपुर-बक्सर निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुने गए थे। उन्होंने संदेश विधानसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 2028 तक था।
अगर पूरे गणित को समझा जाए तो यह चुनाव काफी हद तक राज्यसभा की तरह दिखाई देता है, जहां संख्या बल ही सबसे बड़ा फैक्टर होता है। विधानसभा की कुल 243 सीटों के आधार पर देखा जाए तो किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इसका फॉर्मूला है—कुल विधायकों की संख्या को कुल सीटों की संख्या से भाग देकर उसमें एक जोड़ना।
यानी 243 ÷ 10 = 24.3, जिसे गोल करके 25 माना जाता है। इसी आधार पर एमएलसी चुनाव का गणित तय होता है।
अगर महागठबंधन के कुल विधायकों की संख्या देखें तो यह लगभग 41 बैठती है। ऐसे में उनके लिए दो उम्मीदवार उतारना मुश्किल माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे वह अधिकांश सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में नजर आ रहा है।
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, जिन सीटों पर उपचुनाव होना है, वहां एनडीए की पकड़ मजबूत मानी जा रही है और संभावना है कि ये दोनों सीटें भी उसी के खाते में जाएंगी। मौजूदा स्थिति में महागठबंधन के पास जो तीन सीटें हैं, उनमें से भी आरजेडी अपनी एक सीट ही बचा पाने की स्थिति में दिख रही है।
वहीं एनडीए के भीतर देखें तो बीजेपी के पास 2 और जदयू के पास 4 मौजूदा सीटें हैं। दोनों दलों के पास क्रमशः 85 और 80 विधायक होने के कारण इनका पलड़ा स्पष्ट रूप से भारी है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि 12 सीटों के इस पूरे चुनावी गणित में जदयू और बीजेपी का दबदबा बना रहेगा और एनडीए को इस चुनाव में स्पष्ट बढ़त मिल सकती है।