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cashless medical facility : "वित्त विभाग शिवजी के त्रिशूल पर है क्या ? कहिए तो जाकर पैर पकड़ लें ...," कैशलेस इलाज न मिलने पर भड़के भाजपा MLC

बिहार विधान परिषद में आज एक बार फिर कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर चर्चा हुई। सदस्यों, पूर्व सदस्यों और राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए इस योजना को लागू करने में अब तक देरी का मामला उठाया गया।

cashless medical facility : "वित्त विभाग शिवजी के त्रिशूल पर है क्या ? कहिए तो जाकर पैर पकड़ लें ...," कैशलेस इलाज न मिलने पर भड़के भाजपा MLC

24-Feb-2026 12:48 PM

By First Bihar

cashless medical facility : बिहार विधान परिषद में आज एक बार फिर बिहार विधानमंडल के वर्तमान सदस्य, पूर्व सदस्य, राज्य के सभी सेवानिवृत्त पदाधिकारी और कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर चर्चा की गई। इस योजना की वर्तमान स्थिति को लेकर मामला उठाया गया।


विधान परिषद के सदस्य अजय ने सवाल उठाया कि उन्होंने विधानमंडल के सदस्यों और कई अन्य पदाधिकारियों के कैशलेस इलाज को लेकर पहले भी सवाल किया था। अजय ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी का इलाज भारत के प्रख्यात सर्जन  राज्यवर्धन सिंह आजाद से करवाया, जो स्वयं विधानमंडल के सदस्य भी हैं। इलाज का कुल बिल ₹90,000 था, लेकिन विधानसभा में आवेदन करने पर केवल ₹50,000 ही मिले। दूसरी आंख के इलाज पर मात्र ₹34,000 का ही भुगतान हुआ। अजय ने पूछा कि आखिर यह कैशलेस इलाज कैसे हुआ और इसे लागू करने में क्या समस्या है।


इसके बाद विभागीय मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि इस विषय पर पहले भी सदन में काफी विस्तार से चर्चा हुई है। यह मामला केवल स्वास्थ्य विभाग से नहीं, बल्कि वित्त विभाग से भी जुड़ा हुआ है। इस योजना को लागू करने के लिए वित्त विभाग की समिति की सहमति आवश्यक है। स्वास्थ्य और वित्त विभाग के बीच लगातार वार्तालाप हो रही है और यह विषय गंभीरता से लिया जा रहा है।


बिहार विधान परिषद के सदस्य नवल किशोर यादव (भाजपा) ने कहा कि अन्य राज्यों में इस तरह की व्यवस्था हो रही है, लेकिन वित्त विभाग के अधिकारी इसे लेकर अभी तक निर्णय नहीं ले पाए हैं। उन्होंने बताया कि विधायकों और पार्षदों के लिए इलाज करवाना कष्टप्रद हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग में बिल प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जटिल है और कभी-कभी आधार कार्ड जैसी अनिवार्य जानकारी के कारण भी समस्याएं आती हैं। यादव ने कहा कि मंत्री जी लगातार एक साल से आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ।


इसके बाद सदन में स्वास्थ्य मंत्री से MLC राज्यवर्धन सिंह से भी इस मामले पर कई सवाल किए गए। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने मंत्री से जानना चाहा कि कैशलैस सुविधा लागू करने में क्या अड़चन आ रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि यह पूरी प्रक्रिया वित्त विभाग से जुड़ी है और बिना पैसे की व्यवस्था किए योजना शुरू नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते इसमें देरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि यह विषय सभी को समझ में है और यह वित्तीय मामलों से जुड़ा हुआ है। कोई भी नई योजना लागू करने से पहले वित्त विभाग की सहमति आवश्यक है। विभाग अकेले निर्णय नहीं ले सकता, और बिना वित्त विभाग की अनुमति के इसे लागू करना संभव नहीं है।


इसके बाद सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सदन में कहा कि इलाज में जो पैसा खर्च हुआ उसका पेमेंट अगर देर से होता है, तो क्या विभाग ब्याज देगा। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई व्यवस्था वर्तमान में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कैशलैस व्यवस्था को लागू करने के लिए विभाग गंभीरता से काम कर रहा है और जल्द ही इसे पूरा किया जाएगा। वहीं, विपक्षी नेता संजीव कुमार सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि यूपी, राजस्थान समेत कई राज्यों में यह सुविधा पहले से ही लागू है और बिहार में इसे लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।