VC Appointment :  बिहार में विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। राजभवन ने राज्य के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापनों को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद उच्च शिक्षा व्यवस्था में नई नियुक्ति नीति और गाइडलाइन लागू होने की चर्चा तेज हो गई है। इसे राज्य के विश्वविद्यालय प्रशासन और शैक्षणिक सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


जानकारी के अनुसार वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा, मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय पटना, मगध विश्वविद्यालय बोधगया और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। खासतौर पर मगध विश्वविद्यालय में कुलपति पद के लिए 5 जून को इंटरव्यू प्रस्तावित था। लेकिन इंटरव्यू से पहले ही लोकभवन की ओर से जारी विज्ञापनों को निरस्त कर दिया गया।


राजभवन की तरफ से जारी सूचना में “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर विज्ञापन रद्द करने की बात कही गई है। हालांकि राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में इसे उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सैयद हसनैन के बीच हुई बैठक में विश्वविद्यालयों की स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई थी। इस दौरान कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया, विश्वविद्यालयों में सत्रों की देरी, वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई। माना जा रहा था कि बैठक के बाद जल्द ही नए कुलपतियों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन इसके उलट पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी गई।


अब संकेत मिल रहे हैं कि बिहार में कुलपतियों की नियुक्ति नई गाइडलाइन के तहत की जाएगी। हालांकि राजभवन या सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर नई नीति की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन माना जा रहा है कि नई व्यवस्था में स्थानीय शिक्षाविदों और अनुभवी अकादमिक विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जा सकती है।


सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कुलपति चयन के लिए नई सर्च कमिटी गठित होगी। यही कमिटी उम्मीदवारों के नामों की जांच और चयन प्रक्रिया पूरी करेगी। लोकभवन ने सरकार से सभी विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग प्रतिनिधियों के नाम भी मांगे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की तैयारी की जा रही है।


इधर, छह अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। 20 मई को राजभवन ने जिन विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, उनमें बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा, जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा और आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी शामिल हैं।


इन विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया को फिलहाल प्रभावित नहीं किया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार और राजभवन चरणबद्ध तरीके से नई नियुक्ति प्रणाली लागू करना चाहते हैं। उच्च शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई गाइडलाइन पारदर्शिता और गुणवत्ता को ध्यान में रखकर बनाई गई तो इससे बिहार के विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार हो सकता है।