PATNA: विकसित बिहार के लिए शहरीकरण, औद्योगीकरण और पर्यटन को तीन प्रमुख मंत्र बताते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि राज्य अब इन तीनों क्षेत्रों के जरिए विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अधिवेशन भवन में नगर विकास एवं आवास विभाग (यूडीएचडी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘बिहार अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम’ का शुभारंभ करते हुए मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि बिहार ने पिछले 20 वर्षों में विकास की लंबी और सकारात्मक यात्रा तय की है। समय बदल गया है। अब हमें विकासशील शहर बसाने और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि शहरों के विकास के लिए कार्यक्रमों और योजनाओं में फंड की जरूरत पड़ेगी इसलिए नगर स्थानीय निकायों (यूएलबीएस) के प्रोजेक्ट्स में अगर नवाचार, टिकाऊ विकास और राजस्व सृजन की क्षमता है तो उन्हें ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने कार्यकाल में ऐसे यादगार कार्य करने चाहिए, जिनसे लोगों की जिन्दगी में बड़ा सकारात्मक बदलाव हो और वे उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में याद रखें। साथ ही विश्व, देश और राज्य स्तर पर हो रहे बेहतरीन कार्यों से लगातार सीख लेते हुए, अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें। सैटेलाइट टाउनशिप और डिजिटल नवाचार को शामिल करते हुए बिहार विकास की नई गाथा लिखेगा।
दो वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये बढ़ा संपत्ति कर संग्रहण
नीतीश मिश्रा ने आगे कहा कि राज्य सरकार शहरी प्रशासन को सुदृढ़ बनाने के लिए वित्तीय सहायता में निरंतर वृद्धि करने के लिए प्रतिबद्ध है। जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शहरी विकास योजनाओं एवं प्रतिबद्ध देनदारियों के मद में 15,237 करोड़ रुपये से अधिक के बजट की योजना है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 332 करोड़ रुपये का संपत्ति कर संग्रह बढ़कर वर्ष 2025-26 में 565 करोड़ रुपये पहुंच गया है। संपत्ति कर नगर वित्त व्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए सभी शहरी स्थानीय निकायों को संपत्ति मूल्यांकन सुधार, डिजिटल कर संग्रह प्रणाली तथा कर अनुपालन में वृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
विश्व बैंक के साथ साझेदारी
मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि शहरी कायाकल्प के लिए विश्व बैंक और यूडीएचडी विभाग के बीच साझेदारी की गई है। विश्व बैंक अगले 10 वर्षों तक यूएलबी की वित्तीय आत्मनिर्भरता समेत अन्य क्षेत्रों में सहायता प्रदान करेगा। कार्यशाला का उद्देश्य शहरी विकास से जुड़े अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की क्षमता वृद्धि करना तथा बिहार के नगरों को अधिक सक्षम, समावेशी, सतत एवं भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में आवश्यक ज्ञान एवं कौशल का विकास करना है। इस दौरान वित्तीय प्रबंधन, म्युनिसिपल फाइनेंस, म्युनिसिपल बॉन्ड्स, वित्तीय संसाधनों के सुदृढ़ीकरण, एसेट मैनेजमेंट तथा शहरीकरण से जुड़े विभिन्न आयामों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त एकीकृत स्थानिक एवं आर्थिक नियोजन, समेकित शहरी नियोजन के सिद्धांतों तथा वैश्विक एवं स्थानीय स्तर पर उभर रहे नवीनतम शहरी विकास रुझानों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा एवं विचार-विमर्श का आयोजन किया गया है।
रोजगार सृजन के लिए होगा नियोजित शहरीकरण: प्रधान सचिव
विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि बिहार को नियोजित तरीके से शहरों के परिवर्तन की दिशा में बढ़ना होगा। ग्रामीण जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए पहले कई कार्य किए गए, अब रोजगार सृजन, विकासशील राज्यों की सूची में शामिल होने और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थित शहरीकरण जरूरी है। उन्होंने बताया कि नए टाउनशिप विकसित किए जा रहे हैं। इस कायाकल्प में विश्व बैंक सहयोग कर रहा है। शहरीकरण केवल नए शहर बसाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित शहरों के माध्यम से अर्थव्यवस्था, संस्कृति और रोजगार में व्यापक बदलाव लाना है।
प्रधान सचिव ने यूएलबी कर्मियों से आह्वान किया कि वे वित्तीय आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दें। शहरों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के साथ उसे टिकाऊ बनाने के लिए काम करना होगा। पीपीपी प्रोजेक्ट और स्मार्ट फाइनेंसिंग के जरिए शहरों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। दो दिवसीय कार्यक्रम में यूएलबीएस अधिकारियों-कर्मचारियों को बेहतर शहरीकरण और वित्तीय प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जा रही है।वर्ल्ड बैंक की प्रतिनिधि रोसाना निट्टी ने मौके पर कहा कि शहरों के विकास एवं बेहतर प्रबंधन के लिए नीजी क्षेत्रों से राजस्व हासिल करना होगा। सत्र में वित्तीय सहयोग और अन्य उपलब्ध विकल्पों पर ट्रेनिंग दी जा रही है।
कार्यशाला में नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अनिमेष कुमार पराशर, विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे, अपर सचिव विजय प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त पटना यशपाल मीणा, अपर सचिव मनोज कुमार रजक, संयुक्त सचिव मनोज कुमार सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। विश्व बैंक की ओर से बर्नाडस जे. एच. मस्केन्स, प्रकाश गौर, पूनम अहलूवालिया खनिजो तथा योजी तोरिउमी ने सहभागिता की ।