Bihar Education News: बिहार के सभी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के गुरु दक्षता कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप तैयार करना और शिक्षण कार्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल में दक्ष बनाना है।



राज्य के विश्वविद्यालयों में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नवंबर से पहले आयोजित करने की योजना है। इसके बाद प्रत्येक अंगीभूत महाविद्यालय में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके लिए बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से ट्रेनिंग शेड्यूल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्यक्रम की समय-सारिणी तैयार होने के बाद इसे सभी विश्वविद्यालयों को जारी किया जाएगा।



उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्राध्यापकों में गुणवत्ता, उत्कृष्टता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का विकास करना है। इसके माध्यम से शिक्षकों को बदलती शिक्षा व्यवस्था और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।




सभी शिक्षकों को UGC के गुरु दक्षता कार्यक्रम यानी फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पटना विश्वविद्यालय में संचालित होता था, लेकिन अब राज्यपाल के निर्देश पर इसे बिहार के सभी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों के लिए अनिवार्य बनाने की तैयारी है।




बिहार के विश्वविद्यालयों में जल्द ही व्यापक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति लागू करने की योजना है। इसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, प्रश्नपत्र तैयार करने और शिक्षण कार्य में एआई की मदद ली जाएगी। ऐसे में प्राध्यापकों का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षकों को एआई आधारित तकनीकों की उपयोगिता, उनके प्रभावी इस्तेमाल और आधुनिक शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप शिक्षण कार्य करने के लिए तैयार किया जाएगा।



प्रशिक्षण कार्यक्रम में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा। शिक्षकों को बताया जाएगा कि तकनीक की मदद से पढ़ाने के नए और प्रभावी तरीके कैसे अपनाए जा सकते हैं।



आधुनिक शिक्षण व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्राध्यापकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि वे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अनुभव प्रदान कर सकें। इस पहल के जरिए बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।