Bihar Transfer Policy: बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। लंबे समय से विभिन्न विभागों में चल रहे तबादलों के दौर पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब सामान्य परिस्थितियों में किसी भी विभाग में तबादला नहीं किया जाएगा। केवल गंभीर बीमारी, विशेष मानवीय परिस्थितियों या सरकार द्वारा तय किए गए अपवादों में ही ट्रांसफर की अनुमति मिल सकेगी।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद मनचाही पोस्टिंग की उम्मीद लगाए बैठे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को अब अगले तबादला सत्र का इंतजार करना होगा। यदि किसी कर्मचारी को विशेष कारणों से तबादला चाहिए तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा और अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से मिलने के बाद ही आदेश जारी किए जाएंगे।
गंभीर बीमारी के मामलों में मिलेगी राहत
सरकार ने मानवीय आधार पर कुछ मामलों में राहत का प्रावधान रखा है। यदि कोई कर्मचारी स्वयं गंभीर बीमारी से पीड़ित है या उसके जीवनसाथी अथवा बच्चे का इलाज किसी विशेष स्थान पर चल रहा है, तो ऐसे मामलों में तबादले के आवेदन पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि इसके लिए केवल आवेदन देना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को अपने विभाग के सचिव अथवा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विस्तृत आवेदन देना होगा। इसके बाद विभागीय स्थापना समिति पूरे मामले की समीक्षा करेगी। समिति की अनुशंसा मिलने के बाद फाइल अंतिम स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी। CMO की मंजूरी मिलने के बाद ही तबादले का आदेश जारी किया जाएगा।
पंचायत चुनाव को देखते हुए सख्ती
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी पंचायत चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला बिना राज्य निर्वाचन आयोग की पूर्व अनुमति के नहीं किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों में लगा है, तो उसके स्थानांतरण की फाइल तभी आगे बढ़ेगी जब राज्य निर्वाचन आयोग अपनी सहमति देगा। सरकार का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाए रखना है ताकि प्रशासनिक फेरबदल का असर चुनावी तैयारियों पर न पड़े।
विभाग बदलने के लिए दोनों विभागों की सहमति जरूरी
नई ट्रांसफर व्यवस्था में अंतर-विभागीय प्रतिनियुक्ति को भी पहले से अधिक सख्त बना दिया गया है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी एक विभाग से दूसरे विभाग में जाना चाहता है, तो उसे दोनों विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
उदाहरण के तौर पर यदि स्वास्थ्य विभाग का कोई डॉक्टर जेल अस्पताल में प्रतिनियुक्ति चाहता है, तो उसे स्वास्थ्य विभाग और कारा विभाग दोनों की सहमति लेनी होगी। दोनों विभागों की मंजूरी के बिना संबंधित फाइल पर आगे कार्रवाई नहीं होगी।
पुलिस विभाग को मिलेगी विशेष छूट
हालांकि सरकार ने पुलिस विभाग को इस नई समय-सीमा से बाहर रखा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के तबादले पहले की तरह जरूरत के अनुसार किए जा सकेंगे। यानी सुरक्षा और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर पुलिस विभाग में स्थानांतरण की प्रक्रिया जारी रहेगी।
शिक्षकों के लिए अलग ट्रांसफर नीति
राज्य सरकार ने शिक्षकों के लिए अलग ट्रांसफर नीति लागू की है। इस नीति के तहत महिला और पुरुष शिक्षकों को उनके गृह क्षेत्र या उसके आसपास के पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर पदस्थापित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों को सुविधा मिलेगी और विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था भी बेहतर होगी।
बिना ठोस कारण नहीं मिलेगा तबादला
सरकार के नए निर्देशों से साफ हो गया है कि अब केवल सिफारिश या प्रभाव के आधार पर मनचाही पोस्टिंग हासिल करना आसान नहीं होगा। प्रत्येक आवेदन निर्धारित प्रक्रिया से गुजरेगा और केवल वास्तविक एवं विशेष परिस्थितियों में ही मंजूरी दी जाएगी।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से विभागों में स्थिरता आएगी, अनावश्यक तबादलों पर रोक लगेगी और सरकारी कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी। वहीं, कर्मचारियों के लिए भी यह स्पष्ट संदेश है कि अब सामान्य परिस्थितियों में तबादले की संभावना बेहद सीमित रहेगी और विशेष मामलों में भी मुख्यमंत्री कार्यालय की अंतिम स्वीकृति के बाद ही स्थानांतरण संभव होगा।