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बिहार में बड़ा फैसला! सरकार ने इन अफसर और कर्मचारियों के ट्रांसफर पर लगा दी रोक, अब 2027 तक नहीं होगा तबादला; जानें पूरा अपडेट

बिहार सरकार ने जनगणना कार्य को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों के तबादले पर रोक लगा दी है। यह आदेश 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा जिससे प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे।

08-Apr-2026 07:22 AM

By First Bihar

BIHAR NEWS : बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए राज्य के चुनिंदा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर एवं पोस्टिंग पर रोक लगा दी है। यह रोक आगामी जनगणना कार्य को बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा करने के उद्देश्य से लगाई गई है। सरकार के इस फैसले के अनुसार, संबंधित कर्मियों का तबादला अब 31 मार्च 2027 तक नहीं किया जा सकेगा।


यह निर्णय केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसमें सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती स्थिर रहे, ताकि कार्य की गति और गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े।


केंद्र सरकार के निर्देश के बाद लागू हुआ निर्णय

केंद्रीय गृह सचिव की ओर से सभी राज्यों को भेजे गए पत्र के बाद यह स्पष्ट किया गया कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा नहीं आनी चाहिए। इसी के तहत नोडल विभाग होने के नाते बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं।


इस आदेश को राज्य के सभी विभागों में लागू किया गया है, ताकि जनगणना कार्य में लगे किसी भी कर्मचारी या अधिकारी का स्थानांतरण न हो सके। इससे जनगणना की प्रक्रिया को निरंतर और सुचारू रूप से पूरा करने में मदद मिलेगी।


किन कर्मचारियों पर लागू होगा प्रतिबंध

यह तबादला प्रतिबंध विशेष रूप से उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा, जो जनगणना कार्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। जिन कर्मियों की ड्यूटी जनगणना प्रक्रिया में लगाई गई है, उनकी पोस्टिंग या ट्रांसफर पर अगले एक वर्ष तक पूरी तरह रोक रहेगी। सरकार का मानना है कि यदि बीच में कर्मचारियों का स्थानांतरण होता है तो जनगणना कार्य की गति प्रभावित हो सकती है और डेटा संग्रह में त्रुटियां आने की संभावना बढ़ सकती है।


जनगणना की प्रक्रिया और समयसीमा

देशभर में जनगणना का कार्य 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है। कुछ राज्यों में स्वगणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। बिहार में यह प्रक्रिया 17 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 1 मई 2026 तक चलेगी। इस दौरान नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित की जा सकेगी।


इसके बाद 2 मई 2026 से मकानों के सूचीकरण (House Listing) का कार्य शुरू होगा, जो 31 मई 2026 तक चलेगा। इस चरण में प्रगणक घर-घर जाकर आवासीय संरचना और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे और पहले से भरे गए डेटा का सत्यापन करेंगे।


दूसरा चरण होगा सबसे महत्वपूर्ण

जनगणना का दूसरा चरण वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसे सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह चरण 9 फरवरी से 27 फरवरी 2027 के बीच पूरा किया जाएगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर विस्तृत सर्वेक्षण करेंगे। इस दौरान प्रत्येक परिवार के सदस्य की व्यक्तिगत जानकारी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण विवरण एकत्र किए जाएंगे।


जातिगत जनगणना और डिजिटल प्रक्रिया की विशेषता

इस बार की जनगणना को कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जातिगत गणना भी शामिल की गई है। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया को डिजिटल मोड में संचालित किया जाएगा, जिससे पेपरलेस सिस्टम के जरिए डेटा संग्रह और विश्लेषण अधिक सटीक और तेज़ होगा।


प्रशासनिक तैयारियां पूरी

बिहार सरकार ने जनगणना कार्य को सफल बनाने के लिए सभी जिलों में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समितियों का गठन कर दिया है। इसके साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या न आए।


कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह फैसला जनगणना कार्य को सुचारू और सफल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। तबादला पर रोक से जहां कर्मचारियों की स्थिरता बनी रहेगी, वहीं जनगणना कार्य में पारदर्शिता और दक्षता भी सुनिश्चित होगी। यह व्यवस्था 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी।