Bihar News : सोशल मीडिया पर कुछ सेकेंड की रील और वीडियो बनाने का जुनून अब रेल यात्रियों की सुरक्षा पर भारी पड़ने लगा है। बिहार में चलती ट्रेनों पर ईंट-पत्थर फेंकने की घटनाओं को पुलिस मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है। खासकर फेसबुक और इंस्टाग्राम के लिए वीडियो बनाने के दौरान ट्रेनों को निशाना बनाने के मामले सामने आने के बाद रेलवे पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।


बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के 12 जिलों को ट्रेन पर पत्थरबाजी के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। इनमें पटना, भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, बेतिया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, सारण, गया, वैशाली और नवादा शामिल हैं।


पांच दिन में 134 गिरफ्तार, 34 नाबालिग भी

एडीजी रेल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान पिछले पांच दिनों में 134 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 34 नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, ट्रेन पर पत्थर फेंकने वाले आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और गिरफ्तार लोगों को जेल भेजा गया है।


पुलिस की कार्रवाई का मकसद केवल आरोपितों को पकड़ना नहीं, बल्कि उन स्थानों की पहचान करना भी है जहां इस तरह की घटनाएं बार-बार होती हैं। इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेल पुलिस (GRP) की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।


वंदे भारत और तेजस जैसी ट्रेनों पर ज्यादा नजर

पुलिस की समीक्षा में एक और चिंताजनक बात सामने आई है। पत्थरबाजी करने वाले लोग खासतौर पर वंदे भारत एक्सप्रेस, तेजस और जनशताब्दी जैसी आधुनिक ट्रेनों को निशाना बना रहे हैं।


इन ट्रेनों में लगे कैमरे पुलिस के लिए आरोपितों की पहचान में काफी मददगार साबित हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों में करीब 68 प्रतिशत की पहचान ट्रेनों में लगे कैमरों की मदद से की गई है।


यानी सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने या मजाक-मस्ती के लिए किया गया यह कृत्य कैमरों से बच नहीं पा रहा है। रेलवे पुलिस अब ऐसे संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और कार्रवाई दोनों बढ़ा रही है।


अप्रैल में सबसे ज्यादा घटनाएं, वीकेंड पर भी खतरा

पुलिस मुख्यालय की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन पर पत्थर फेंकने की घटनाएं अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा दर्ज की गईं। इसके अलावा सप्ताह के कुछ खास दिनों में भी ऐसी घटनाओं की संख्या अधिक देखी गई है। गुरुवार के साथ शनिवार और रविवार को पत्थरबाजी के मामले ज्यादा सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है।


पूछताछ में कई गिरफ्तार आरोपितों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने यह हरकत रील बनाने, वीडियो रिकॉर्ड करने या दोस्तों के साथ मनोरंजन के लिए की थी। हालांकि पुलिस इसे महज शरारत नहीं मान रही है, क्योंकि चलती ट्रेन पर फेंका गया एक पत्थर यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।


सात साल तक की सजा का प्रावधान

ट्रेन पर पत्थरबाजी करने वालों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और रेल यात्रियों की जान-माल को खतरे में डालने जैसे आरोपों में कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान बताया गया है।


पुलिस मुख्यालय ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया कंटेंट के नाम पर की जाने वाली ऐसी हरकतों को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा। विशेष अभियान के दौरान पत्थरबाजी वाले स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है और वहां लोगों को इसके कानूनी परिणामों की जानकारी दी जा रही है।


यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम

रेलवे पुलिस का फोकस अब उन इलाकों पर है जहां चलती ट्रेनों को बार-बार निशाना बनाया जाता है। खासकर आधुनिक ट्रेनों में लगे कैमरों की मदद से आरोपितों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।


कुछ सेकेंड की वायरल रील के लिए ट्रेन पर पत्थर फेंकना किसी भी स्थिति में मामूली शरारत नहीं है। एक पत्थर ट्रेन की खिड़की से अंदर बैठे यात्री को गंभीर रूप से घायल कर सकता है। ऐसे में पुलिस की सख्ती के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी माना जा रहा है।