Bihar Land News : बिहार में जमीन खरीदने-बेचने वालों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने टोपो लैंड की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और लगान निर्धारण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कर दिया है कि टोपो लैंड सरकारी संपत्ति है और इस पर किसी भी व्यक्ति का निजी अधिकार मान्य नहीं होगा। विभाग की ओर से इस संबंध में राज्य के 14 जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही सभी अधीनस्थ कार्यालयों को भी इस फैसले की जानकारी देने को कहा गया है ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके।
सरकार के इस फैसले के बाद अब टोपो लैंड की रजिस्ट्री नहीं होगी और न ही उसका दाखिल-खारिज किया जाएगा। इसके अलावा ऐसी जमीन पर लगान निर्धारण की प्रक्रिया भी पूरी तरह बंद रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भूमि सर्वेक्षण के बाद भी सरकार ने इस जमीन को लेकर कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया है, इसलिए फिलहाल इस पर किसी तरह का निजी स्वामित्व स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दरअसल, बिहार में वर्ष 2017 से 2022 तक टोपो लैंड की खरीद-बिक्री पर पहले से ही रोक लगी हुई थी। लेकिन साल 2022 में कुछ शर्तों के साथ इसकी खरीद-बिक्री फिर शुरू हो गई थी। इसके बाद कई जगहों पर खाता और खेसरा नंबर की जगह सिर्फ “टोपो” लिखकर जमीन की रजिस्ट्री होने लगी। इस प्रक्रिया को लेकर लगातार विवाद और कानूनी सवाल उठ रहे थे। इसी बीच बेगूसराय के जिलाधिकारी ने मार्च 2022 में राजस्व विभाग से इस विषय पर मार्गदर्शन मांगा था। इसके बाद विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा कर अब नई गाइडलाइन जारी की है।
प्रधान सचिव द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि 13 मई 1935 को प्रिवी काउंसिल द्वारा दिए गए फैसले के अनुसार टोपो लैंड मूल रूप से सरकारी भूमि मानी गई है। इसके अलावा महाधिवक्ता और विधि विभाग से प्राप्त कानूनी राय में भी इसे सरकारी जमीन ही माना गया है। ऐसे में किसी रैयत या व्यक्ति के स्वामित्व को वैध नहीं माना जा सकता। सरकार का कहना है कि ऐसी जमीन पर निजी अधिकार देने से भविष्य में बड़े भूमि विवाद पैदा हो सकते हैं।
बिहार के जिन 14 जिलों में टोपो लैंड मौजूद है उनमें पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, भोजपुर, सारण, सिवान, खगड़िया, गोपालगंज, बक्सर और पश्चिम चंपारण शामिल हैं। इनमें ज्यादातर टोपो लैंड दियारा क्षेत्रों में स्थित है। हालांकि सारण जिला ऐसा है जहां शहरी इलाके में भी टोपो लैंड पाई जाती है।
टोपो लैंड मुख्य रूप से उन क्षेत्रों को कहा जाता है जो नदियों का रास्ता बदलने के कारण बनते हैं। कई बार नदी कटाव और बहाव के कारण नई जमीन उभर आती है, लेकिन उसका राजस्व सर्वे नहीं हो पाता। इसके अलावा ऐसी गैर-मजरुआ या असर्वेक्षित भूमि, जिसका पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता, उसे भी टोपो लैंड की श्रेणी में रखा जाता है। यही वजह है कि इन जमीनों का स्पष्ट खाता और खेसरा नंबर नहीं होता और बाद में विवाद की स्थिति बन जाती है।
सरकार के इस फैसले को भूमि विवाद रोकने और सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब आने वाले समय में टोपो लैंड को लेकर राज्य सरकार नई नीति बना सकती है, लेकिन फिलहाल इस पर पूरी तरह रोक लागू रहेगी।