Bihar News : बिहार सरकार ने राज्य के हाईवे और प्रमुख पुलों पर टोल टैक्स व्यवस्था को नया स्वरूप देने का फैसला किया है। राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राज्य उच्च पथ (स्टेट हाईवे) पर टोल टैक्स सड़क की चौड़ाई के आधार पर तय किया जाएगा। पथ निर्माण विभाग ने फिलहाल करीब 50 सड़कों की पहचान की है, जबकि अन्य मार्गों का सर्वे अभी जारी है।
नई व्यवस्था के तहत जिन राज्य उच्च पथों की चौड़ाई 5.5 मीटर से कम होगी, उन पर किसी प्रकार का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। वहीं चौड़ी और बहु-लेन सड़कों पर वाहन चालकों को अधिक टोल देना होगा। सरकार का उद्देश्य बेहतर सड़क रखरखाव और नई परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना बताया जा रहा है।
शहर के अंदर की सड़कों पर नहीं लगेगा टोल
नई नीति में आम लोगों को बड़ी राहत भी दी गई है। पथ निर्माण विभाग के अनुसार, यदि कोई राज्य उच्च पथ किसी शहर की सीमा के भीतर आता है, तो उस हिस्से पर टोल टैक्स नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (MDR) श्रेणी की सड़कों को भी टोल व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
इस फैसले का सबसे अधिक फायदा पटना जैसे शहरों को मिलेगा, जहां शहर के भीतर आने वाली कई प्रमुख सड़कें एमडीआर श्रेणी में शामिल हैं। ऐसे मार्गों पर पहले की तरह लोगों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के आवागमन की सुविधा मिलती रहेगी।
इन परियोजनाओं पर लगेगा टोल
पटना और उसके आसपास के इलाकों में जेपी गंगा पथ तथा कच्ची दरगाह–बिदुपुर छह लेन पुल को टोल टैक्स वाली परियोजनाओं में शामिल किया गया है। चूंकि ये आधुनिक और अधिक चौड़ाई वाले मार्ग हैं, इसलिए यहां अपेक्षाकृत अधिक टोल वसूला जाएगा।
हालांकि पाटलि पथ और अटल पथ को फिलहाल टोल टैक्स से मुक्त रखा गया है। वहीं सरकार पटना से बख्तियारपुर के बीच पुराने एनएच-30 को भी भविष्य में टोल व्यवस्था के दायरे में लाने की योजना पर काम कर रही है।
सड़क की चौड़ाई से तय होगी टोल दर
नई नीति के अनुसार टोल की राशि प्रति किलोमीटर तय होगी, लेकिन इसका निर्धारण सड़क की चौड़ाई और लेन की संख्या के आधार पर किया जाएगा।
- छह लेन सड़क पर सबसे अधिक टोल लिया जाएगा।
- चार लेन और उससे कम चौड़ाई वाली सड़कों पर टोल अपेक्षाकृत कम होगा।
- कई मामलों में कम चौड़ाई वाली सड़कों पर टोल दर छह लेन मार्गों की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
- 5.5 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर कोई टोल नहीं लगेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सड़क की गुणवत्ता और निर्माण लागत के अनुसार शुल्क तय करना है।
खनन क्षेत्रों के वाहनों के लिए अलग नियम
सरकार ने खनन क्षेत्रों से गुजरने वाले भारी वाहनों के लिए अलग प्रावधान किया है। यदि कोई राज्य उच्च पथ खनन क्षेत्र में स्थित है, तो वहां सड़क की चौड़ाई के आधार पर छूट नहीं मिलेगी। ऐसे वाहनों से प्रति किलोमीटर निर्धारित दर के अनुसार टोल टैक्स लिया जाएगा।
सर्वे का काम जारी
पथ निर्माण विभाग ने बताया कि राज्य की कई अन्य सड़कों का सर्वेक्षण अभी जारी है। सर्वे पूरा होने के बाद जरूरत के अनुसार नई सड़कों और पुलों को भी टोल टैक्स व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि इस नई नीति से सड़क अवसंरचना के विकास और रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
नई टोल पॉलिसी लागू होने के बाद वाहन चालकों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि वे जिस मार्ग से यात्रा कर रहे हैं, उसकी श्रेणी और चौड़ाई क्या है, क्योंकि अब उसी आधार पर टोल टैक्स की राशि निर्धारित होगी।