Bihar Tender Scam : बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा विशेष निगरानी इकाई (SVU) को कई अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार ठेकेदार रिशुश्री को लेकर जांच एजेंसियों का दावा है कि उसने सरकारी ठेकों से जुड़े एक ऐसे नेटवर्क का संचालन किया, जिसके माध्यम से कथित रिश्वत और कमीशन की रकम को वैध कारोबारी लेन-देन का रूप देकर सिस्टम में खपाया जाता था।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रिशुश्री सरकारी विभागों में पसंदीदा कंपनियों को टेंडर दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाता था। इसके बाद संबंधित परियोजनाओं में अपनी ही कंपनी को उपठेकेदार के रूप में जोड़कर अतिरिक्त भुगतान और बढ़े हुए बिलों के जरिए धन का प्रवाह सुनिश्चित किया जाता था। एजेंसियों का मानना है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से कथित कमीशन की रकम को सामान्य व्यापारिक खर्च के रूप में दिखाया जाता था, जिससे उस पर आसानी से संदेह नहीं हो सके।
प्राथमिकी और जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रिशुश्री केवल नकद भुगतान पहुंचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि कथित अवैध कमाई के निवेश और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभालता था। जांच के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज, संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने आए हैं, जिनकी गहन पड़ताल की जा रही है।
विदेश यात्राओं ने बढ़ाया संदेह
ED की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षों में रिशुश्री की विदेश यात्राओं में अचानक उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उसने दुबई समेत यूरोप के कई देशों की लगातार यात्राएं कीं और वहां लंबे समय तक ठहराव भी किया।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन यात्राओं का संबंध कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन के निवेश और प्रबंधन से हो सकता है। छापेमारी के दौरान जब्त मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे विदेशी संपर्कों और वित्तीय गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा सके।
कई विभागों के अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार, रिशुश्री के बयान और अब तक जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर कई विभागों से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इनमें जल संसाधन विभाग, नगर विकास विभाग, भवन निर्माण विभाग तथा बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) से संबंधित मामलों की पड़ताल शामिल है।
SVU वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों की खरीद-बिक्री और विदेश यात्राओं के बीच संभावित संबंधों को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित तौर पर अर्जित धन का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया।
कुछ वर्षों में खड़ी की विशाल संपत्ति
जांच अधिकारियों का दावा है कि रिशुश्री ने महज सात से आठ वर्षों के भीतर करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। ED को मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में उसके बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट निवेश हैं। इसके अलावा पटना और हाजीपुर में पेट्रोल पंप से जुड़े निवेश की भी जानकारी सामने आई है।
लग्जरी वाहनों का बड़ा कलेक्शन
जांच के दौरान कई महंगी गाड़ियों से संबंधित दस्तावेज भी एजेंसियों के हाथ लगे हैं। इनमें पोर्शे मैकन, बीएमडब्ल्यू, लैंड रोवर डिस्कवरी स्पोर्ट, टोयोटा लैंड क्रूजर और बीएमडब्ल्यू आर नाइनटी स्क्रैम्बलर जैसी लग्जरी गाड़ियां शामिल बताई जा रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इन वाहनों की खरीद वर्ष 2022 से 2024 के बीच की गई थी।
फिलहाल रिशुश्री को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ED और SVU दोनों एजेंसियां मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई अन्य अधिकारियों, कारोबारियों और कंपनियों पर भी कार्रवाई की संभावना बन सकती है। जांच की दिशा इस ओर संकेत कर रही है कि सरकारी टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार का यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।