Bihar News: बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। मामले में गिरफ्तार ठेकेदार रिशुश्री से गहन पूछताछ की तैयारी तेज कर दी गई है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने उससे पूछताछ के लिए करीब 100 सवालों की सूची तैयार की है और अदालत से सात दिनों की रिमांड की मांग की है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड मिलने के बाद घोटाले से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं।


सूत्रों के अनुसार, SVU ने गुरुवार को अदालत में रिमांड याचिका दाखिल की। फिलहाल कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अदालत इस पर निर्णय ले सकती है। यदि एजेंसी को रिमांड मिलती है तो पूछताछ के दौरान टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े लोगों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी।


इस बीच रिशुश्री की न्यायिक हिरासत अवधि बढ़ाकर 25 जून तक कर दी गई है। वह फिलहाल बेउर जेल में बंद है। उसके साथ इस मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपी संतोष, तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह भी न्यायिक हिरासत में हैं।


जांच एजेंसियों का मानना है कि पूरे मामले में रिशुश्री सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। शुरुआती जांच में कई सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से उसके संबंधों की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि उसने प्रशासनिक और सरकारी तंत्र में अपनी पहुंच कैसे बनाई और उसे किस स्तर पर सहयोग मिला।


SVU की पूछताछ का बड़ा हिस्सा कथित टेंडर सेटिंग और कमीशन नेटवर्क को समझने पर केंद्रित रहेगा। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि विभिन्न विभागों के टेंडरों में कथित हेरफेर कैसे किया जाता था, अधिकारियों तक रकम पहुंचाने की प्रक्रिया क्या थी और पूरे नेटवर्क का संचालन किस तरह होता था। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कमीशन की राशि और उसका वितरण किन आधारों पर तय किया जाता था।


जांच के दायरे में रिशुश्री द्वारा बनाई गई कंपनियां और उनके वित्तीय स्रोत भी शामिल हैं। एजेंसी यह जानना चाहती है कि इन कंपनियों में शुरुआती निवेश कहां से आया और इनके जरिए आर्थिक गतिविधियां किस प्रकार संचालित की गईं। इसके अलावा रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर बनाई गई कंपनियों, संपत्तियों और संभावित बेनामी निवेशों की भी पड़ताल की जाएगी।


ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी SVU कई सवाल पूछने की तैयारी में है। जांचकर्ताओं का मानना है कि देशभर की कंपनियों की भागीदारी वाली ई-टेंडर प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ खास तरीके अपनाकर लाभ लिया गया हो सकता है। पूछताछ के दौरान इसी पहलू पर भी विस्तार से जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी।


विदेश यात्राओं और संभावित विदेशी निवेश को लेकर भी एजेंसियों की नजर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, रिशुश्री ने पिछले कुछ वर्षों में कई देशों की यात्राएं की थीं। जांच टीम यह जानना चाहती है कि इन दौरों का उद्देश्य क्या था, किन लोगों से मुलाकात हुई और क्या इन यात्राओं का संबंध किसी आर्थिक या कारोबारी नेटवर्क से था।


जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि अदालत से रिमांड की अनुमति मिल जाती है तो पूछताछ के दौरान कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही टेंडर घोटाले के पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और कथित संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। इसी वजह से इस मामले को बिहार की हालिया सबसे चर्चित और महत्वपूर्ण जांचों में से एक माना जा रहा है।