BIHAR TEACHER NEWS : राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वार्षिक क्षमता संवर्धन के लिए इस वर्ष भी सेवाकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं और करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता को बढ़ाना और कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने का निर्देश दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह मॉड्यूल एक सप्ताह के भीतर तैयार कर लिया जाएगा। मॉड्यूल इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वह कक्षा की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो और शिक्षकों को व्यवहारिक स्तर पर बेहतर शिक्षण के लिए सक्षम बना सके।
शिक्षा विभाग का मानना है कि पारंपरिक सैद्धांतिक प्रशिक्षण के बजाय अब व्यावहारिक और गतिविधि आधारित प्रशिक्षण की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूल में ऐसे कंटेंट शामिल किए जाएंगे, जो सीधे कक्षा में उपयोगी हों। इससे शिक्षक नई शिक्षण तकनीकों को सीखकर छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार कर सकेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम मई के पहले सप्ताह से शुरू होगा और इसे जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक जिले में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के माध्यम से पांच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण का शेड्यूल संबंधित जिलों द्वारा तय किया जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्था की जा सके।
विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किसी भी विद्यालय से एक साथ अधिक संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए न बुलाया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि विद्यालयों में पढ़ाई बाधित न हो और छात्रों की नियमित शिक्षा जारी रह सके। इसके लिए बैचवार प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
मॉड्यूल निर्माण में केवल एससीईआरटी ही नहीं, बल्कि डायट के व्याख्याताओं, विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ-साथ सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन की विशेषज्ञ टीम भी शामिल होगी। इन संस्थाओं का अनुभव प्रशिक्षण को और अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने में मदद करेगा।
एससीईआरटी के विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को केवल सिद्धांतों तक सीमित न रखकर उन्हें कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू करने योग्य बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को कक्षा-स्तर की रणनीतियों से अवगत कराया जाएगा, उनका अभ्यास कराया जाएगा और उन्हें दैनिक शिक्षण कार्य में शामिल करने के तरीके सिखाए जाएंगे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कक्षा 1 और 2 के शिक्षकों को शामिल किया जाएगा, क्योंकि प्रारंभिक कक्षाओं में मजबूत नींव तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बाद दूसरे चरण में कक्षा 3 से 5 तक के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग का यह कदम राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह प्रशिक्षण प्रभावी रूप से लागू होता है, तो इससे न केवल शिक्षकों की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों के सीखने के परिणामों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।