Bihar News : बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण को लेकर शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। प्रशिक्षण के लिए टैग किए गए शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया गया है। बिना पूर्व अनुमति प्रशिक्षण से गैरहाजिर रहने वाले शिक्षकों पर विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, संबंधित अधिकारियों को की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है।


राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO-SSA) को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों को अपने अधीन आने वाले सभी शिक्षकों की प्रशिक्षण में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी करने को कहा गया है।


प्रशिक्षण से गायब रहे तो पहले देनी होगी अनुमति

SCERT निदेशक यतेन्द्र कुमार पाल की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई शिक्षक किसी कारण से प्रशिक्षण में शामिल होने में असमर्थ है, तो उसे पहले सक्षम प्राधिकार से अनुमति लेनी होगी। बिना पूर्व अनुमति प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने पर शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


यानी अब केवल प्रशिक्षण के लिए टैग होना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित शिक्षक को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण में शामिल होना होगा। किसी अपरिहार्य कारण से उपस्थित नहीं हो पाने की स्थिति में पहले से अनुमति लेना जरूरी होगा।


अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी

शिक्षा विभाग ने सिर्फ शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि जिला स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है। SCERT ने अधिकारियों से कहा है कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि टैग किए गए शिक्षक निर्धारित संख्या में प्रशिक्षण में भाग लें।


निर्देश में यह भी कहा गया है कि यदि किसी शिक्षक के खिलाफ अनुपस्थिति को लेकर कार्रवाई की जाती है तो उसकी जानकारी निदेशक को दी जाए। विभागीय स्तर पर निगरानी में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।


NEP 2020 से जुड़ा है प्रशिक्षण

सरकार की यह कवायद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास की व्यवस्था से जुड़ी है। नीति में शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और शिक्षण क्षमता को लगातार बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसी उद्देश्य से सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को समय-समय पर सेवाकालीन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


इसके लिए शिक्षकों को ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों में टैग किया जाता है। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षण तभी प्रभावी होगा, जब शिक्षक निर्धारित कार्यक्रम में नियमित रूप से भाग लें और उसमें सक्रिय योगदान दें।


लक्ष्य के मुताबिक नहीं पहुंच रहे शिक्षक

SCERT के निर्देश के मुताबिक वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रशिक्षण के लिए टैग किए गए शिक्षक अपेक्षित संख्या में भाग नहीं ले रहे हैं। इसी को देखते हुए विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों को अब ज्यादा प्रभावी निगरानी करने को कहा है।


पत्र में अधिकारियों को यह भी बताया गया है कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अनुश्रवण और कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में इसे गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


अब प्रशिक्षण को लेकर विभाग का सख्त संदेश

नए निर्देश के बाद शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो गई है। प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए टैग किए गए शिक्षकों को निर्धारित कार्यक्रम का पालन करना होगा। वहीं, अनुपस्थिति की स्थिति में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।


शिक्षा विभाग का फोकस केवल शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज कराने पर नहीं, बल्कि प्रशिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी है। सरकार चाहती है कि शिक्षक नियमित रूप से अपने पेशेवर कौशल को अपडेट करें, ताकि इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मिल सके।


इसलिए अब प्रशिक्षण से दूरी बनाना शिक्षकों के लिए आसान नहीं होगा। बिना अनुमति गैरहाजिरी पर कार्रवाई होगी और इसकी जवाबदेही संबंधित अधिकारियों तक तय की जा सकती है।