बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में एक बार फिर शिक्षकों के ड्रेस कोड का मुद्दा गरमा गया। सदन में राजद विधायक ने शिक्षा विभाग से सवाल किया कि जब सरकार ने शिक्षकों और कर्मियों के लिए फॉर्मल ड्रेस पहनकर विद्यालय आने की नीति लागू कर दी है तो फिर इसका पालन जमीन पर क्यों नहीं हो रहा है। विधायक ने आरोप लगाया कि आदेश जारी होने के बावजूद ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक ड्रेस कोड का पालन नहीं कर रहे हैं और विभाग सिर्फ कागजों पर कार्रवाई की बात कर रहा है।
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से पहले ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर 2024 को पत्र जारी कर राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि सभी शिक्षक संस्थानों में पदस्थापित शिक्षक और कर्मी कार्यालय अवधि के दौरान गरिमापूर्ण औपचारिक परिधान यानी फॉर्मल ड्रेस में ही विद्यालय आएं।
मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि इस मामले में हाल ही में 20 जुलाई 2026 को भी एक नया पत्र जारी किया गया है। इसमें सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि कोई शिक्षक या कर्मी ड्रेस कोड का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
वहीं राजद विधायक ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया था कि ड्रेस कोड को लेकर 2019 में योजना बनाई गई थी, जिसे 2024 में नोटिफाई किया गया और अब 2026 में दोबारा रिमाइंडर जारी किया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी अधिकतर विद्यालयों में शिक्षक ड्रेस कोड का पालन नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा मंत्री से पूछा कि जब सरकार विधि सम्मत कार्रवाई की बात कर रही है तो आखिर वह कार्रवाई क्या होगी? अब तक कितने शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है? विधायक ने कहा कि अगर दो साल बाद सिर्फ रिमाइंडर जारी करना है और अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो सरकार की नीति क्या है।
जवाब में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विभाग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में निर्देश जारी किए गए थे और अब दोबारा सभी अधिकारियों को इसकी याद दिलाई गई है। मंत्री ने कहा कि अगर किसी विद्यालय में ड्रेस कोड का पालन नहीं हो रहा है तो सदस्य इसकी जानकारी विभाग को दें, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने सदन में बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ 48 घंटे के अंदर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार विद्यालयों में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा विभाग के नए निर्देश के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक ड्रेस कोड का कितना पालन करते हैं और कितने शिक्षकों पर कार्रवाई होती है। फिलहाल विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।