Bihar News : बिहार में गन्ना और चीनी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में नई चीनी मिलें स्थापित करने के लिए निवेशकों को जमीन से लेकर आर्थिक सहायता तक कई बड़ी सुविधाएं देने का फैसला किया गया है। नई नीति के तहत योग्य निवेशकों को महज 1 रुपये की टोकन राशि पर करीब 40 एकड़ तक जमीन उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके साथ ही नई चीनी मिल लगाने पर 70 करोड़ रुपये तक का अनुदान भी दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य बिहार में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना है। इसके लिए बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 लागू की गई है। नई नीति के जरिए सरकार निजी निवेश को आकर्षित करने और गन्ना आधारित उद्योगों को विस्तार देने की कोशिश कर रही है।
1 रुपये में 40 एकड़ तक जमीन
नई चीनी मिल लगाने के इच्छुक निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत जमीन को लेकर है। नीति के तहत पात्र निवेशकों को करीब 40 एकड़ तक भूमि सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि जमीन की उपलब्धता आसान होने से बड़े निवेशकों को बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे गन्ना किसानों को भी स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है।
3500 TCD क्षमता वाली मिल पर 70 करोड़ का अनुदान
नई नीति में चीनी मिल की उत्पादन क्षमता के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन भी तय किया गया है। 3500 TCD क्षमता यानी प्रतिदिन 3500 टन गन्ने की पेराई करने वाली नई चीनी मिल स्थापित करने पर निवेशक को 70 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।
यह राशि एक साथ नहीं बल्कि पांच समान वार्षिक किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं, यदि कोई निवेशक 3500 TCD से अधिक क्षमता की चीनी मिल स्थापित करता है तो उसे अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। 3500 TCD से ऊपर क्षमता में प्रत्येक 100 TCD की वृद्धि पर 2 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।
पुरानी मिलों के विस्तार को भी मिलेगा फायदा
सरकार का फोकस केवल नई चीनी मिलें लगाने तक सीमित नहीं है। पहले से संचालित चीनी मिलों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
नीति के मुताबिक 1000 TCD क्षमता के विस्तार पर 15 करोड़ रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त 100 TCD क्षमता विस्तार पर 1.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।
इससे राज्य में मौजूद चीनी मिलों को आधुनिक बनाने और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
25 नई चीनी मिलों का लक्ष्य
बिहार सरकार ने प्रदेश में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी भी बनाई गई है।
सरकार की योजना गन्ना उत्पादन वाले क्षेत्रों में उद्योग को बढ़ावा देने की है, ताकि किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर स्थानीय बाजार मिल सके। नई मिलों के खुलने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।
गांवों के विकास पर भी सरकार का जोर
इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की प्रत्येक पंचायत में 10 प्रमुख योजनाओं की पहचान कर उन्हें पूरा कराने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि योजनाओं के समय पर पूरा होने से ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा सकेगा।
पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी केंद्रों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। जिन इलाकों में स्वास्थ्य केंद्र या सामुदायिक भवन के लिए भवन उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए निर्माण की दिशा में काम करने का निर्देश दिया गया है।
कुल मिलाकर बिहार सरकार की नई गन्ना उद्योग नीति को राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने, किसानों को बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।