Stone Mining Bihar : बिहार में पत्थर खनन गतिविधियों को दोबारा गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। खान एवं भूतत्व विभाग ने सात जिलों में पत्थर खदानों को फिर से संचालित करने की तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत संबंधित जिलों की डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार कर ली गई है और अब जल्द ही खनन पट्टों की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


विभागीय सूत्रों के अनुसार शेखपुरा, गया, रोहतास, औरंगाबाद, कैमूर और बांका जिलों की डीएसआर रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। वहीं नवादा जिले की रिपोर्ट को विभागीय मंजूरी भी मिल गई है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब इन जिलों में स्थित पत्थर खदानों को ई-नीलामी के जरिए आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


जानकारी के मुताबिक सातों जिलों में कुल 31 पत्थर खदानों से खनन कार्य संचालित करने की योजना है। बरसात समाप्त होने के बाद चरणबद्ध तरीके से खनन गतिविधियां शुरू कराई जाएंगी। विभाग का कहना है कि सभी आवश्यक पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही खदानों का संचालन शुरू किया जाएगा।


खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डीएसआर तैयार करने के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं का गहन अध्ययन किया गया है। इसमें संबंधित क्षेत्रों की भूगर्भीय स्थिति, खनिज भंडार की उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव, जल स्रोतों पर असर और आसपास की आबादी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विस्तृत आकलन शामिल है। इन सभी मानकों की जांच के बाद ही रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया है।


सरकार का उद्देश्य खनन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध बनाना है। इसी कारण खनन पट्टों की ई-नीलामी ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी। इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अवैध खनन और अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि पत्थर खनन गतिविधियां शुरू होने से राज्य के कई क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। खदानों के संचालन से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं परिवहन, क्रशर उद्योग, निर्माण सामग्री आपूर्ति और अन्य सहायक व्यवसायों से जुड़े लोगों को भी सीधा लाभ होगा। इसके अलावा स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।


गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से बिहार में पत्थर खनन सीमित स्तर पर हो रहा था। इसके कारण निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक पत्थरों की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों से करनी पड़ रही थी। बाहरी राज्यों पर निर्भरता बढ़ने से निर्माण सामग्री की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिली थी। अब राज्य में ही पर्याप्त मात्रा में पत्थर उपलब्ध होने से निर्माण कार्यों की लागत कम होने और परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।


सरकार को उम्मीद है कि नई खनन नीति और ई-नीलामी व्यवस्था के जरिए राज्य को बेहतर राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी निर्माण सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। बरसात के बाद जैसे ही खदानों का संचालन शुरू होगा, बिहार के निर्माण और औद्योगिक क्षेत्र को इसका बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर पत्थर खनन की वापसी राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।